Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

Breaking News:

latest

ममता पर संगीन आरोप, BJP से क्या कोई लिंक... नंदीग्राम केस से अलग हुए जस्टिस चंदा ने बताया सबकुछ

कोलकाता कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा नंदीग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली पश्चिम ...

कोलकाताकलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा नंदीग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई से बुधवार को अलग हो गए। वहीं उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग किए जाने की मांग के तरीके पर बनर्जी पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया। बनर्जी की चुनाव याचिका पर सुनवाई से अलग होते हुए जस्टिस कौशिक चंदा ने कहा कि वह विवाद को जिंदा रखने की कोशिशों को विफल करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस चंदा ने कहा कि पहली बार 18 जून को केस उनके सामने आया था, तब उनसे सुनवाई से अलग होने की कोई अपील नहीं की गई। लेकिन सुनवाई के बाद टीएमसी नेता उनकी फोटो और बीजेपी से उनके जुड़ाव की जानकारी लेकर तैयार थे। इस बारे में उन्होंने कई ट्वीट भी किए। उन्होंने कहा कि अब तक जो घटनाक्रम हुआ, उससे साफ है कि मुझे सुनवाई से हटाने की अपील डालने से पहले मेरे फैसले को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर और सचेत तरीके से कोशिश की गईं। जज ने अपने 13 पेज के फैसले में कहा, ‘समस्या पैदा करने वाले ये लोग विवाद को जिंदा रखने की कोशिश करेंगे और नए विवाद पैदा करेंगे। इस बेंच के सामने मामले की सुनवाई से उन लोगों को बढ़ावा मिलेगा। ये न्याय के हित में नहीं होगा और ऐसी कोशिशों को शुरुआत में ही रोक दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई निर्बाध तरीके से चलनी चाहिए जैसे अन्य किसी मामले में चलती है। क्या है पूरा मामला?दो मई को चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। इस दौरान ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी से 1956 वोटों से हार गई थीं। नतीजे के दिन ममता बनर्जी ने दोबारा वोटों की गिनती की मांग की थी लेकिन जिसे चुनाव आयोग ने नहीं मांगा। इसके बाद ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था। ममता को क्यों आपत्ति थी जस्टिस चंदा को लेकर?जस्टिस चंदा की 2016 में बीजेपी लीगल सेल के एक कार्यक्रम में शामिल होने की दो तस्वीरें सामने आई थीं। न्यायमूर्ति चंदा ने कहा कि टीएमसी के लोग एक तरह से उन मामलों की लिस्ट लेकर तैयार थे जिनमें मैंने वकील के रूप में बीजेपी का पक्ष रखा था। बनर्जी की याचिका में दावा किया गया था कि वह 2015 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए जाने तक बीजेपी के सक्रिय सदस्य थे और चूंकि बीजेपी के एक उम्मीदवार के निर्वाचन को चुनौती दी गई है, इसलिए फैसले में पूर्वाग्रह होने की आशंका है। न्यायमूर्ति चंदा ने कहा था कि वह बीजेपी के लीगल सेल के संयोजक कभी नहीं रहे, लेकिन पार्टी की ओर से अनेक मामलों में कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश हुए थे। सियासी झुकाव के आरोप पर क्या बोले जस्टिस चंदा?जस्टिस चंदा ने कहा कि देश के अन्य किसी भी नागरिक की तरह जज भी किसी राजनीतिक दल के पक्ष में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करता है, लेकिन मामले में फैसला करते समय वह व्यक्तिगत झुकाव को दरकिनार कर देता है। न्यायमूर्ति चंदा ने कहा, ‘मजे की बात है कि मामले से जुड़े दो जानेमाने वकीलों की अच्छी सियासी पहचान है और जो याचिकाकर्ता की पार्टी के विरोधी है।’ बता दें कि ममता बनर्जी की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी और एसएन मुखर्जी केस लड़ रहे हैं। ममता की धारणा पर उठाए सवाल?जस्टिस चंदा ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी जज की नियुक्ति के संबंध में अपनी सहमति या आपत्ति के आधार पर उन्हें सुनवाई से अलग करने की मांग नहीं कर सकते। वादी की अपनी धारणाओं के आधार पर जज को पक्षपातपूर्ण नहीं कहा जा सकता। जस्टिस चंदा ने कहा, ‘अगर इस दलील को मान लिया जाता है तो इस अदालत में चुनाव याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती है क्योंकि याचिकाकर्ता ने राज्य की मुख्यमंत्री होने के नाते इस अदालत के अधिकतर जजों की नियुक्ति पर अपनी सहमति या असहमति दी है।’


from Hindi Samachar: हिंदी समाचार, Samachar in Hindi, आज के ताजा हिंदी समाचार, Aaj Ki Taza Khabar, आज की ताजा खाबर, राज्य समाचार, शहर के समाचार - नवभारत टाइम्स https://ift.tt/3dVTEyp
https://ift.tt/3wn6cFl

No comments