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गोरखपुर कांड: पुलिसवाले के दामन पर पहले भी दाग, थाना बदनाम... अब क्यों भागे-भागे फिर रहे ये?

अनुराग पांडेय, गोरखपुर गोरखपुर पुलिस पर कानपुर के व्‍यापारी को पीट-पीटकर मार डालने के आरोपों की वजह से विवाद और आलोचनाओं के घेरे में है। इ...

अनुराग पांडेय, गोरखपुरगोरखपुर पुलिस पर कानपुर के व्‍यापारी को पीट-पीटकर मार डालने के आरोपों की वजह से विवाद और आलोचनाओं के घेरे में है। इस मामले में रामगढ़ताल थाने के इंस्‍पेक्‍टर सहित छह पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया है। बुधवार को नए इंस्पेक्टर की भी तैनाती कर दी गई है। वहीं इस केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन इस मामले में आरोपी इंस्‍पेक्‍टर और पर पहले भी इस तरह आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल, सभी आरोपी फरार हैं। आरोप है कि अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर के रामगढ़ताल इलाके में स्थित होटल ठहरे मनीष गुप्ता की सोमवार की आधी रात को पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी। मनीष गुप्ता के दोस्त हरियाणा निवासी हरदीप और प्रदीप ने पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाया। वहीं मनीष गुप्ता की अपने भांजे से मोबाइल से बातचीत का आडियो भी सामने आया है। इसमें पता चला कि पुलिसवाले उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। मौत की बात छिपाने का आरोपआरोप यह भी है कि पिटाई के बाद मौत होने पर पुलिस ने शव को करीब डेढ़ घंटे तक छिपाए रखा। पिटाई के बाद तबियत बिगड़ने पर पुलिसवाले मनीष को पहले एक प्राइवेट हास्पिटल में ले गए और वहां से हालत गंभीर बताकर मेडिकल कालेज ले गए। इस बीच मनीष की मौत हो गई। तीन नामजद और तीन अज्ञात उधर, शासन के निर्देश पर एसएसपी ने 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया। देर रात तमाम हंगामों के बाद सीएम योगी की पहल पर इंस्पेक्टर जगत नारायन सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र और सब इंस्पेक्टर विजय यादव को नामजद और तीन अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। क्राइम ब्रांच को सौंपा गया केसमनीष की हत्या का केस दर्ज होने के बाद विवेचना को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। दरअसल जिस थाना क्षेत्र में घटना हुई उसी थाने के पूर्व थानेदार सहित अन्य पुलिसवालों पर केस है इसलिए उसकी विवेचना वहां कराने पर पुलिस ही कठघरे में घिर सकती है। इस लिए पूरी विवेचना क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई। एसपी क्राइम की निगरानी में यह विवेचना आगे बढ़ेगी। रामगढ़ताल पुल‍िस पर पहले भी लगे हैं आरोपरामगढ़ताल पुलिस पर किसी को पीटकर मार डालने का आरोप कोई नई बात नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार ऐसे आरोप लगते रहे हैं। 13 अगस्त को भी रामगढ़ताल पुलिस पर 20 वर्षीय गौतम सिंह सिंह की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध मौत के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में पुलिस ने केस दर्ज किया कि गायघाट बुजुर्ग में प्रमिका से मिलने गए युवक की लड़की के परिवार वालों ने पीटकर हत्या कर दी, जबकि परिजनों का आरोप था कि युवक की मौत पुलिस की पिटाई से हुई है। इंस्‍पेक्‍टर जगत नारायन सिंह भी विवादों में रहे हैंइसी तरह से बांसगांव इंस्पेक्टर रहने के दौरान 7 नवंबर 2020 को भी जेएन सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। बांसगांव थाने में विशुनपुर निवासी मुन्ना प्रसाद के बेटे शुभम उर्फ सोनू कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज था। पुलिस ने उसे 11 अक्तूबर 2020 को डिघवा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया और जेल भिजवा दिया। 7 नवंबर को जेल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में फिर पुलिस पर आरोप लगा कि शुभम की मौत पिटाई से हुई है। तत्कालीन चौकी इंचार्ज को सस्पेंड किया गया था। मंगलवार को यह तीसरा मामला सामने आया है। पहले भी होटल में ठहरने वालों को टागरेट कर चुकी है पुलिसरामगढ़ताल पुलिस अपने कारनामों को लेकर पहले भी चर्चा में रही है। 11 जुलाई को 8 कथित बदमाशों को गायघाट लहसड़ी फोरलेन अंडर पास से पुलिस की टीम ने दबोचा था। पुलिस का दावा था कि यह गैंग शहर में डकैती की बड़ी योजना बना रहे थे। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग भी की, लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि बदमाशों के पास से पुलिस ने बरामद कुछ भी नहीं किया था। जबकि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने दावा किया था कि वह शहर के एक होटल में ठहरे थे और वे गोरखपुर किसी से मिलने आए आए थे। पकड़े गए लोगों में अधिकांश गांधीनगर गुजरात के थे। एनकाउंटर कर सिपाही से इंस्पेक्टर बने जेएन सिंहबताया जाता है कि रामगढ़ताल इंस्पेक्टर जगत नारायन सिंह एनकाउंटर के शौकीन हैं। गोरखपुर जिले में कार्यकाल के दौरान उन्होंने यहां अब तक चार बदमाशों के पैर में गोली मारी है। सिकंदर को गोली मारने से पहले उन्होंने रामगढ़ताल में ही अमित हरिजन को गोली मारकर गिरफ्तार किया था, जबकि बांसगांव इंस्पेक्टर रहते हुए शातिर बदमाश राधे यादव और झंगहा इंस्पेक्टर रहते हुए हरिओम कश्यप को भी पैर में गोली मारी थी। पुलिस विभाग के जुड़े जानकारों के मुताबिक इंस्पेक्टर जगत नारायन सिंह इसी तरह के एनकाउंटर की बदौलत ही सिपाही से आउट आफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। एसटीएफ में रहने के दौरान भी उन्होंने करीब 9 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया है।


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