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बेटों को जुदाई बर्दाश्त नहीं, घर के बाहर पति ने बनवाया पत्नी का मंदिर, देखें तस्वीरें

शाजापुर जिला से करीब 3 किमी दूर ग्राम सांपखेड़ा में बने मंदिर की खूब चर्चा पूरे इलाके में है। यह मंदिर अपने आप में खास है क्योंकि इस इलाके म...

शाजापुर जिला से करीब 3 किमी दूर ग्राम सांपखेड़ा में बने मंदिर की खूब चर्चा पूरे इलाके में है। यह मंदिर अपने आप में खास है क्योंकि इस इलाके में लोग आज तक ऐसा मंदिर नहीं देखा है और न ही सुना है। ऐसे में लोगों को उत्सुकता है। इस मंदिर में भगवान के रूप में एक महिला की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे निधन के बाद परिवार के लोग भगवान मानते हैं। पति ने बेटों के संग मिलकर घर के बाहर अपनी पत्नी का मंदिर बनवा दिया है। इसमें तीन फीट ऊंचाई वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रति दिन परिवार के लोग उन्हें निहार कर तसल्ली करते हैं।

गांवों में देवी-देवताओं या फिर किसी व्यक्ति विशेष का मंदिर बनते सुना होगा। ऐसे कई मामले पूरे देश से सामने आए हैं। मगर एमपी के शाजापुर जिले में एक शख्स अपनी पत्नी के निधन के बाद घर के बाहर मंदिर बनवाया है।


अपनी मां को बेहद याद कर रहे थे बेटे, घर के बाहर पति ने बनवाया पत्नी का मंदिर, देखें तस्वीरें

शाजापुर जिला से करीब 3 किमी दूर ग्राम सांपखेड़ा में बने मंदिर की खूब चर्चा पूरे इलाके में है। यह मंदिर अपने आप में खास है क्योंकि इस इलाके में लोग आज तक ऐसा मंदिर नहीं देखा है और न ही सुना है। ऐसे में लोगों को उत्सुकता है। इस मंदिर में भगवान के रूप में एक महिला की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे निधन के बाद परिवार के लोग भगवान मानते हैं। पति ने बेटों के संग मिलकर घर के बाहर अपनी पत्नी का मंदिर बनवा दिया है। इसमें तीन फीट ऊंचाई वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रति दिन परिवार के लोग उन्हें निहार कर तसल्ली करते हैं।



कोरोना की दूसरी लहर में महिला का निधन
कोरोना की दूसरी लहर में महिला का निधन

दरअसल, ग्राम सांपखेड़ा निवासी बंजारा समाज के नारायण सिंह राठौड़ अपनी पत्नी और बेटों के साथ परिवार सहित रह रहे थे। परिवार में सभी कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन नरायणसिंह की पत्नी गीताबाई धार्मिक कार्यक्रमों में ज्यादा सम्मिलित रहती थीं। भजन-कीर्तन में प्रतिदिन जाने के साथ ही वो भगवान की भक्ति में रमी हुई थीं। ऐसे में परिवार के बेटे अपनी मां को देवी तुल्य ही समझते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान गीताबाई की तबीयत बिगड़ने लगी। गीताबाई के बेटे संजय उर्फ लक्की राठौड़ ने बताया कि लाखों के खर्च के बाद भी मां नहीं बच पाई। 27 अप्रैल 2021 को उनका निधन हो गया।



मां की कमी महसूस कर रहे थे बेटे
मां की कमी महसूस कर रहे थे बेटे

बेटों के साथ हमेशा साए की तरह रहने वाली मां की कमी उनके बच्चे सहन नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद उनलोगों ने अपने पिता नारायण सिंह के साथ विचार-विमर्श किया। इसी दौरान मंदिर बनाने का प्रस्ताव दिया। महिला के पति और बेटों ने मिलकर गीताबाई की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया।



राजस्थान के अलवर के कलाकारों ने तैयार की है प्रतिमा
राजस्थान के अलवर के कलाकारों ने तैयार की है प्रतिमा

गीताबाई के बेटे लक्की ने बताया कि मां के चले जाने से पूरा परिवार टूट गया था। ऐसे में सभी ने तय करके मां की प्रतिमा बनवाने का निर्णय लिया। इसके चलते मां के निधन के बाद तीसरे के कार्यक्रम वाले दिन ही 29 अप्रैल को उनकी प्रतिमा बनवाने का ऑर्डर दे दिया। राजस्थान स्थित अलवर के कलाकारों ने इस प्रतिमा को तैयार किया है। डेढ़ महीने बाद इसे घर लेकर आए।



सिर्फ बोलती नहीं, लेकिन हर समय मौजूद तो है
सिर्फ बोलती नहीं, लेकिन हर समय मौजूद तो है

लक्की ने बताया कि मां की प्रतिमा को बनवाने के बाद जब प्रतिमा घर पर आई तो एक दिन प्रतिमा को घर में रखा। इसी दौरान घर के ठीक बाहर मुख्य दरवाजे के समीप प्रतिमा की स्थापना के लिए चबूतरा बनवाया गया। दूसरे दिन विधिवत प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। लक्की ने बताया कि अब प्रतिदिन वो सुबह उठते ही अपनी मां को देख लेता है। लक्की का कहना है कि अब मां सिर्फ बोलती नहीं है, लेकिन वो हर समय मेरे और पूरे परिवार के साथ मौजूद रहती है।



मेन रोड से दिखाई देती है प्रतिमा
मेन रोड से दिखाई देती है प्रतिमा

प्राण प्रतिष्ठा के बाद परिवार के लोगों ने इस जगह के मंदिर का रूप से दे दिया है। अब हर दिन यहां घर के लोग पूजा पाठ करते हैं। बेरछा रोड स्थित ग्राम सांपखेड़ा में मुख्य मार्ग से ही गीताबाई की प्रतिमा का मंदिर दिखाई देता है। इस मंदिर में प्रतिमा को प्रतिदिन परिजन साड़ी ओढ़ाकर ही रखते हैं।





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