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Caste Census : पिछड़ों की जातिगत जनगणना संभव नहीं, पीएम मोदी से नीतीश को सुप्रीम कोर्ट के जरिए मैसेज

दिल्ली/पटना सुप्रीम कोर्ट के जरिए केंद्र सरकार ने बिहार को साफ-साफ मैसेज दे दिया कि जातिगत जनगणना संभव नहीं है। हाल ही में सीएम नीतीश और ...

दिल्ली/पटना सुप्रीम कोर्ट के जरिए केंद्र सरकार ने बिहार को साफ-साफ मैसेज दे दिया कि जातिगत जनगणना संभव नहीं है। हाल ही में सीएम नीतीश और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलकर कराने की मांग की थी। 2021 में जातीय जनगणना संभव नहीं- केंद्र महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि 2021 की जनगणना में ओबीसी आबादी की अलग से गिनती करने का निर्देश न दिया जाए। ओबीसी आरक्षण के संबंध में जातिगत जनगणना () के आंकड़ों की याचिका में मांग की गई थी। मामले में गुरुवार को केंद्र के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। केंद्र सरकार ने कहा जाति से संबंधित जनगणना के उपलब्ध डिटेल विश्वसनीय नहीं है। जाति से संबंधित जनगणना के रिकॉर्ड के आधार पर किसी प्रकार के आरक्षण, रोजगार या स्थानीय चुनाव के लिए उपयुक्त नहीं है. 'जातिगत जनगणना नहीं करना नीतिगत फैसला' सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 2021 की जनगणना में जाति जनगणना को शामिल करने की मांग का भी विरोध किया। केंद्र सरकार ने कहा कि जनगणना के लिए सवालों कि सूची पहले ही बनाई जा चुकी हैं। किसी भी मामले में जाति को जनगणना में शामिल नहीं करने का फैसला एक नीतिगत मामला है। अब क्या करेंगे नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव? केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा रूख इसलिए अहम है कि बिहार से दस दलों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। ये सभी जातीय जनगणना कराए जाने की मांग किए थे। नीतीश कुमार कई बार बयान दे चुके हैं कि वो केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। नीतीश कुमार को सीधे-सीधे जवाब तो नहीं मिला मगर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के रूख से साफ हो गया कि वो जातीय जनगणना कराने के मूड में बिल्कुल नहीं है। बिहार बीजेपी के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी भी जातीय जनगणना के पक्ष में कई बार बयान दे चुके हैं। 2011 का डेटा भी सार्वजनिक नहीं होगा- केंद्र याचिका में महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र और दूसरे संबंधित प्राधिकरणों से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित (Socio Economic Caste Census) एसईसीसी 2011 के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की। उसने कोर्ट में कहा कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद मुहैया नहीं कराया जा रहा है। इस पर केंद्र की ओर से कहा गया कि वो कच्चा डेटा तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है। अविश्वसनीय और इस्तेमाल करने के लायक नहीं है। नौकरियों में कोटा निर्धारित करना, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश या चुनाव के लिए अनुपयोगी है। इसलिए इसे आधिकारिक नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है। इस मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 26 अक्टूबर तय की गई है।


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