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Exclusive : सोनिया-राहुल की नाक के नीचे बिहार कांग्रेस में चल रहा बड़ा खेल... पढ़िए एक्सक्लूसिव खबर

पटना: बिहार कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा का कार्यकाल 17 सिंतबर को पूरा हो गया। माना जा रहा था कि इससे पहले BPCC को नया अध्यक्ष...

पटना: बिहार कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा का कार्यकाल 17 सिंतबर को पूरा हो गया। माना जा रहा था कि इससे पहले BPCC को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्या ये पार्टी की प्रक्रिया की वजह से है, जवाब है नहीं। हमारी एक्सक्लूसिव खबर में बात कुछ और ही निकली है। सोनिया-राहुल की नाक के नीचे बड़ा खेल इस को लेकर हमने बिहार के कांग्रेस के एक वरिष्ठ और विश्वसनीय सूत्र से बात की। उन्होंने जो जानकारी दी वो चौंकाने वाली थी। सूत्र का कहना है कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद पर प्रभारी भक्त चरण दास ने कुंटुंबा विधायक राजेश राम का नाम दिल्ली दरबार में बढ़ाया। लेकिन ढाई महीने से इस पर मंजूरी नहीं मिल रही। सहमति क्यों नहीं मिली यही बड़ा खेल है। दो पदों पर एक ही जाति के नेताओं से समीकरण बिगड़ेगा बिहार कांग्रेस के सूत्र के मुताबिक पार्टी का समीकरण ये है कि राज्य के तीन बड़े पदों पर जातीय समीकरण बराबर रहे, उसमें ऊंच-नीच न हो। ऐसे में प्रभारी पद पर दलित (भक्त चरण दास), विधायक दल का नेता सवर्ण (अजीत शर्मा) और अध्यक्ष पद पर या तो कोई अतिपिछड़ा या फिर अल्पसंख्यक। लेकिन प्रभारी भक्त चरण दास ने अध्यक्ष पद के लिए एक दलित नेता का नाम आगे बढ़ाया। यानि प्रभारी भी दलित और बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष भी दलित। ऐसे में वोट बैंक का समीकरण कांग्रेस साध नहीं पाती। साथ ही इससे पार्टी में टिकट बंटवारे से लेकर बाकी सभी फैसलों में पक्षपात की गुंजाइश खत्म हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक यही वजह थी कि बिहार प्रभारी के राजेश राम वाले प्रस्ताव को हाईकमान से दो बार मंजूरी नहीं मिली। अब सवाल ये कि क्या प्रभारी को अध्यक्ष पद के लिए कोई दूसरा नाम नहीं सूझ रहा या फिर वो एक ही नाम को अंतिम विकल्प मान या बना रहे हैं। लेकिन वहीं सोनिया और राहुल के पास बिहार कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस बारे में उन्हें अलग फीडबैक भी दे दिया। अध्यक्ष पद के पीछे ये है खेल बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खेल बहुत बड़ा है। हमारे विश्वसनीय सूत्र के मुताबिक इसके पीछे बिहार प्रभारी भक्त चरण दास की अपनी अलग रणनीति है। वो चाहते हैं कि किसी भी हाल में अध्यक्ष उनका खास ही रहे। ताकि पद पर वो रहे जिससे उनके फैसलों पर मुहर लगने में किसी भी विवाद या बाधा की गुंजाइश ही खत्म हो जाए। सूत्र का तो यहां तक कहना है कि भक्त चरण दास बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर अपने आदमी को बिठाना चाहते हैं। 17 सितंबर को प्रभारी ने BPCC मदन मोहन झा को क्या कहा था हमारे सूत्र के मुताबिक 17 सितंबर को इस मामले पर बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा से बात की। उन्हें कहा कि उनका (मदन मोहन झा) का कार्यकाल आज (17 सितंबर) को खत्म हो जाएगा। कल (18 सितंबर) बिहार प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सूत्र के मुताबिक इसकी वजह राजेश राम के नाम पर हाईकमान की मंजूरी नहीं मिलना था। हमने इस पूरे मसले पर बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास से बात करने के लिए उनके मोबाइल पर कॉल लगाई। लेकिन उधर से फोन ही नहीं उठाया गया। हम चाहते थे कि उनका पक्ष भी इस खबर में शामिल करें लेकिन उनके कॉल रिसीव न करने से ये संभव नहीं हो पाया। समझिए कांग्रेस के वोट बैंक का समीकरण बिहार कांग्रेस के हमारे विश्वसनीय सूत्र के मुताबिक प्रभारी की पसंद का खामियाजा पार्टी को 2024-2025 के चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि राज्य में दलित वोटों का विभाजन है जिसमें कांग्रेस को एक हिस्सा मिलने की ही गुंजाइश है। बिहार के 15 फीसदी दलित-महादलित वोटों में महादलित के नारे के चलते नीतीश कुमार और बीजेपी के साथ है, कुछ जीतन राम मांझी के साथ और कुछ कांग्रेस के साथ। किसी दलित नेता को नेतृत्व देने का वैसे भी कांग्रेस को ऐसे में कोई फायदा नहीं मिलेगा। सूत्र के मुताबिक 2015 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने सवर्ण उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। इस दौरान सवर्ण वोटों का झुकाव भी कांग्रेस की तरफ हुआ और इसकी वजह से अर्से बाद कांग्रेस के रिकॉर्ड विधायक जीते थे। ऐसे में कांग्रेस को सवर्ण और ओबीसी वोट बैंक भी दिख रहा है। वहीं अल्पसंख्यक वोट शुरू से ही कांग्रेस की तरफ एलाइन रहे हैं। कौन हैं अध्यक्ष पद की रेस में सूत्र के मुताबिक अध्यक्ष पद की रेस में कांग्रेस से बेगूसराय की पूर्व विधायक अमिता भूषण, MLC प्रेमचंद्र मिश्रा, अशोक राम जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन ये नाम फिलहाल रेस में ही हैं और इन पर कोई फैसला नहीं हुआ है।


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