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नीतीश-मोदी के बीच ये कैसा रिश्ता? मिलने पहुंचे तो PM ने 15 मिनट कराया इंतजार, नहीं मानते CM की कोई डिमांड

पटना यूं तो पूरे देश को मैसेज दिया जाता रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरी दोस्ती है, ले...

पटना यूं तो पूरे देश को मैसेज दिया जाता रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरी दोस्ती है, लेकिन रियलिटी में कुछ और दिखता है। केंद्र सरकार की ओर से जातीय जनगणना कराने की डिमांड खारिज किए जाने के बाद से पीएम मोदी और सीएम नीतीश के रिश्तों को लेकर एक बार फिर से चर्चाओं का बाजार गरम है। चर्चा शुरू हो चुका है कि क्या पीएम मोदी और सीएम नीतीश मजबूरी में एक-दूसरे का साथ निभा रहे हैं, क्या दोनों इसी ताक में हैं कि मौका मिलते ही एक दूसरे से राह अलग कर लेंगे? 15 मिनट कराया इंतजार फिर भी नहीं मानी जातीय जनगणना की डिमांडबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में जातीय जनगणना कराने का प्रस्ताव पास कराया। इसके बाद वह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को साथ लेकर दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर देश भर में जाति आधारित जनगणना कराने की डिमांड रखी थी। मीडिया में खबरें आई थीं कि सीएम नीतीश जब तेजस्वी यादव समेत तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ पीएम मोदी से मिलने पहुंचे तो उन्हें पहले 15 मिनट इंतजार कराया गया। इस मुलाकात के बाद सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव समेत तमाम दलों के नेता प्रसन्न थे कि पीएम मोदी ने गंभीरता से उनकी बातें सुनी। इतना कुछ होने के बाद भी केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि वह जातीय जनगणना नहीं कराने जा रही है। क्योंकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर बताया है कि जातिवार जनगणना नहीं होगी। जेडीयू ने पार्टी बैठक में सीएम नीतीश को पीएम मैटेरियल का प्रस्ताव पास कियासीएम नीतीश और पीएम मोदी की इस मुलाकात के ठीक बाद पहले जेडीयू के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश को प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य उम्मीदवार बताया फिर जेडीयू की बैठक में इसी बात का प्रस्ताव पास कराया गया। हालांकि खुद नीतीश कुमार ने इस बात को नकार दिया था। लेकिन यह बात तो कोई भी समझ सकता है कि बिना नीतीश कुमार की मर्जी के जेडीयू कें कुछ हो जाए ऐसा कहीं से संभव नहीं दिखता है। सीएम की तमाम डिमांड को खारिज करते रहे हैं पीएम मोदीयह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के सीएम नीतीश कुमार की डिमांड को सामने से खारिज करते आए हैं। नीतीश कुमार ने मंच से अपील की थी कि वह पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दें, लेकिन उसी कार्यक्रम में मौजूद पीएम मोदी ने उनकी डिमांड को खारिज कर दिया था। इसके बाद सीएम नीतीश ने केंद्र सरकार से पटना बक्सर हाइवे की डिमांड की तो उस वक्त कहा गया कि राज्यों के छोटे-छोटे स्वार्थ की वजह से हाइवे ठीक से बन नहीं पाते हैं। नीतीश की डिमांड को नकातरे हुए कहा गया कि वाराणसी से बक्सर को हाइवे के जरिए जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जेडीयू केंद्र सरकार में मजबूत हिस्सेदारी चाह रही थी, लेकिन पीएम मोदी ने उसे भी स्वीकार नहीं किया था। आखिरकार मंत्रिमंडल विस्तार होने पर भी पीएम मोदी ने जेडीयू को केवल एक ही मंत्री पद दिया। इसके अलावा एनआरसी, फोन टैपिंग मामला हो चाहे दो बच्चों का मुद्दा, तमाम मसलों पर सीएम नीतीश बीजेपी से इतर जाकर अपना पक्ष रखते रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नाम पर NDA से अलग हुए थे नीतीशसाल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार एनडीए से केवल पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर ही अलग हुए थे। नीतीश ने चुनाव प्रचार के दौरान यहां तक कहा था कि उनमें पीएम बनने के ज्यादा गुण हैं। क्योंकि वह केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि नीतीश का यह दांव उल्टा हो गया था। जेडीयू बिहार में केवल 2 लोकसभा सीटों पर सिमट गई थी। इसके बाद आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की अगुवाई वाले एनडीए को जोरदार पटखनी दी थी। हालांकि करीब डेढ़ साल बाद ही नीतीश एक बार फिर से पीएम मोदी से साथ आ गए। 'लालू से अक्सर होती है बात, BJP के कहने पर बना हूं सीएम'सीएम नीतीश ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद कहा था कि वह बीजेपी के कहने पर मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं। क्योंकि इस वक्त राज्य में जेडीयू 43 सीटों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी है और बीजेपी 74 सीटों के साथ गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा जब पत्रकारों ने सीएम नीतीश से पूछा था कि क्या उनकी लालू प्रसाद यादव से बात होती है तब उन्होंने कहा था कि अक्सर बात हो जाती है। वहीं लालू को जमानत मिलने पर नीतीश ने कहा कि यह कोर्ट का मामला है इसलिए वह इसपर कुछ भी नहीं कहेंगे। ये तमाम बातें कई राजनीतिक चर्चाओं को हवा देती हैं। इतना ही नहीं पिछले कुछ समय से तेजस्वी यादव सीएम नीतीश पर सीधे हमलावर नहीं होते हैं। इस वक्त बीजेपी के नेता और डेप्युटी सीएम तारकिशोर प्रसाद के रिश्तेदार को ठेका देने की बात को जोरशोर से उठाया जा रहा है। एलजेपी नेता चिराग पासवान की ओर से नल जल योजना में धांधली की बात कहकर जहां सीएम नीतीश को निशाना बनाया गया वहीं तेजस्वी इसपर मौन रहे। जातिय जनगणना के मसले पर नीतीश कुमार ने जिस तरह से तेजस्वी की डिमांड को मानते हुए पीएम से मिलने पहुंच गए ये तमाम बातें कई अटकलों को हवा दे रही है।


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