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एमपी में छा सकता है अंधेरा, तीन दिन का बचा है कोयला, जानें अभी कितना है स्टॉक

भोपाल कोयले की कमी की वजह से पूरे देश बिजली संकट (Power Crisis In MP) बढ़ सकता है। कई जगहों पर बिजली की कटौती भी शुरू हो गई है। एमपी में ...

भोपाल कोयले की कमी की वजह से पूरे देश बिजली संकट (Power Crisis In MP) बढ़ सकता है। कई जगहों पर बिजली की कटौती भी शुरू हो गई है। एमपी में भी कुछ इसी तरह की स्थिति है। अगर सभी पावर प्लांट पूरी क्षमता के साथ चलें तो प्रदेश में तीन दिन का ही कोल स्टॉक है। मगर कोई भी प्लांट पूरी क्षमता के साथ नहीं चल रहा है, ऐसे में यह स्टॉक सात दिन तक चल सकता है। अगर समय रहते आपूर्ति नहीं हुई तो प्रदेश में बिजली की समस्या उत्पन्न हो सकती है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने कहा कि स्थिति गंभीर है, मगर सरकार प्रबंध करेगी। सूत्रों ने बताया कि एमपी में सिंगाजी थर्मल पावर स्टेशन सबसे बड़ा और आधुनिक है। अगर यह पूरी क्षमता के साथ चलता है तो यहां केवल डेढ़ दिन का कोयले का स्टॉक है। ऐसे में यहां दैनिक आधार पर कोयले की खरीद हो रही है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरी स्थिति का पूरे दिन में चार बार रिव्यू कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जो जानकारी मिली है कि उसके हिसाब में एमपी थर्मल प्लांट अभी 44 फीसदी क्षमता के साथ चल रहे हैं। अमरकंटक थर्मल प्लांट में अभी कोयले का स्टॉक 22973.8 टन है। अभी जिस हिसाब से यह प्लांट चल रहा है, उस हिसाब कोयला 7.07 दिन तक चल सकता है। अगर पूरी क्षमता के साथ चलता है तो 3.53 दिन चल सकता है। सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट में 61,952.6 टन कोयला है। अभी के हिसाब से यह प्लांट 7.79 दिन चल सकता है। पूरी क्षमता के साथ चले 3.89 दिन में कोयला खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट में 77917.2 टन कोयला है, अभी के हिसाब से यह 6.24 दिन का स्टॉक है। अगर पूरी क्षमता के साथ चले तो 3.12 दिन में खत्म हो जाएगा। श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में अभी 58684.3 टन कोयला है। अभी के हिसाब से 2.94 दिन चल सकता है। पूरी क्षमता के साथ चले तो तीन दिन के अंदर खत्म हो सकता है। उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय संकट है, लेकिन हम इसे संभाल लेंगे। कोयला रोज आ रहा है और हम जितना खर्च कर रहे हैं, उससे कुछ ज्यादा ही खरीद रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय कर रहे हैं कि आपूर्ति में कोई व्यवधान न हो। स्थिति गंभीर है लेकिन आपूर्ति बढ़ाने के लिए सभी उपाय कर रहे हैं। विभिन्न माध्यमों से कोयले का परिवहन किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश में ब्लैक आउट की स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि एमपी में शनिवार शाम तक बिजली की डिमांड 10 हजार 900 मेगावाट थी। प्रदेश के जल, पवन, सौर और थर्मल प्लांटों से 4200 मेगावाट बिजली मिली। बाकी की बिजली सेंट्रल सेक्टर और प्राइवेट कंपनियों से ली गई। सूत्रों के हिसाब से अभी प्रदेश में 23 रैक कोयले की हर दिन जरूरत है, मगर सप्लाई 8 से 10 रैक है।


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