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बथर्ड पर भी अखिलेश नहीं हुए शिवपाल पर 'मुलायम', 2022 में आएंगे साथ या अलग रहेगी राह?

लखनऊ सैफई परिवार में होने वाली हर हलचल में सियासी गलियारे में एक ही सवाल का जवाब तलाशा जाता है कि अखिलेश-शिवपाल कब एक होंगे? पिछले, एकाध म...

लखनऊसैफई परिवार में होने वाली हर हलचल में सियासी गलियारे में एक ही सवाल का जवाब तलाशा जाता है कि अखिलेश-शिवपाल कब एक होंगे? पिछले, एकाध महीने के घटनाक्रमों व बयानों से ऐसा लग रहा था कि 22 नवंबर को यह सवाल हल हो जाएगा। लेकिन नेताजी के जन्मदिन पर भी सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल पर 'मुलायम' नहीं हो पाए। सपा के मंच से इस मसले का कोई जिक्र नहीं हुआ तो सैफई में शिवपाल यादव का दर्द भी छलक उठा कि उन्हीं के तरफ से कहा गया था कि आज एक हो जाएंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले हुए परि'वॉर' के चलते चुनाव के बाद शिवपाल यादव ने सपा से अलग राह चुन ली थी। इस दौरान उन्होंने मुलायम सिंह यादव को भी अपने पाले में करने की कोशिश की। लेकिन शिवपाल के मंच से सपा को जिताने की अपील कर मुलायम ने बता दिए कि इस युद्ध में वह किसके साथ खड़े हैं? दो साल से चर्चाएं 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों ने अलग-अलग सियासी किस्मत भी आजमायी। शिवपाल अपनी सहित सभी सीटें हार गए। अखिलेश यादव, बसपा से गठबंधन के बाद भी महज पांच सीटों पर सिमट गए। इसके बाद से चाचा-भतीजा के एक होने की कवायद दोनों दलों के पुराने चेहरों की ओर से शुरू हुई। करीब दो साल से चर्चाएं, कयास, बयान व दोनों ओर से गरमी-नरमी के संकेत तो हैं लेकिन नतीजे नहीं। शिवपाल की नरमी भी निकाल पा रही राह सोमवार को सैफई में शिवपाल यादव ने मुलायम का जन्मदिन मनाया। इस दौरान उन्होंने खुद सार्वजनिक तौर पर कहा कि हमारी प्राथमिकता समाजवादी पार्टी है। हम समर्थकों के लिए 100 सीटें चाहते थे लेकिन इससे भी पीछे हट गए। शिवपाल इससे पहले भी सार्वजनिक तौर पर अखिलेश यादव के नेतृत्व की तारीफ कर चुके हैं। शिवपाल को बेटे के भविष्य की चिंता सूत्रों का कहना है कि शिवपाल को अपने से अधिक अपने बेटे आदित्य यादव के सियासी भविष्य की चिंता है। 2019 में अकेले लड़कर वह नतीजे देख चुके हैं। ऐसे में अगर 2022 में उनकी और उनके समर्थकों की सियासी स्थिति सम्मानजनक नहीं रही तो आगे की सियासत संकट में आ जाएगी। इसलिए सपा आज भी सुरक्षित विकल्प है। यही वजह है कि रथयात्रा, दूसरे दलों से गठबंधन जैसी तमाम चर्चाओं के बाद भी शिवपाल उम्मीद की डोर सपा से ही जोड़ रहे हैं। अखिलेश व शिवपाल की एकता के सबसे बड़े सूत्रधार मुलायम ही हो सकते हैं इसलिए जन्मदिन पर शिवपाल को उम्मीदें अधिक थीं। सम्मान के दावों के बीच संशय भी सपा मुखिया अखिलेश यादव कई बार सार्वजनिक मंचों से शिवपाल यादव के सम्मानजनक समायोजन की बात कर चुके हैं। चुनाव में अब तीन महीने का वक्त बचा है, लेकिन अब तक अखिलेश ने समायोजन का कोई फॉर्म्यूला नहीं दिया है। नवंबर के पहले सप्ताह में सैफई में उनके बयानों के बाद लगा था कि जन्मदिन तक मसला सुलझ जाएगा। अखिलेश के मन में अब भी टीस! सूत्रों का कहना है कि शिवपाल और उनके बेटे आदित्य यादव को विधानसभा सीट पर वॉकओवर देने के लिए तो अखिलेश सहमत हैं, लेकिन, इससे अधिक विस्तार व भूमिका को लेकर वह आश्वस्त नहीं है। खासकर, 2017 के अनुभव और 2019 में खुले विरोध की टीस अब तक अखिलेश के मन से निकली नहीं है इसलिए, जन्मदिन पर एका की चर्चाएं जमीन पर नहीं उतर पाईं। हालांकि, सपा का कहना है कि अखिलेश ने पहले ही साफ कर दिया था कि नेताजी का जन्मदिन सादगी से मनाएंगे, उसे पॉलिटिकल इवेंट नहीं बनाएंगे।


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