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Bihar Politics : बिहार विधानमंडल के शीत सत्र से पहले तेजस्वी के सामने बड़ी मुश्किल, महागठबंधन विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होगी कांग्रेस

पटना बिहार विधानमंडल का शीत सत्र 29 नवंबर से शुरू होना है, लेकिन उससे पहले महागठबंधन में उपचुनाव के वक्त खिंच चुकी तलवार पर फिर से धार चढ...

पटना बिहार विधानमंडल का शीत सत्र 29 नवंबर से शुरू होना है, लेकिन उससे पहले महागठबंधन में उपचुनाव के वक्त खिंच चुकी तलवार पर फिर से धार चढ़ाई जा रही है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वो ऐसे किसी भी कदम से परहेज करेगी जिससे ऐसा लगे कि वो महागठबंधन में RJD के साथ है। तेजस्वी के लिए विधानसभा में बड़ी मुश्किल अब तक खुद को महागठबंधन का नेता प्रोजेक्ट कर रहे तेजस्वी यादव के लिए तो बिहार विधानसभा के शीत सत्र में एक तरह से अग्निपरीक्षा ही होगी। ऐसा इसलिए कि सालों बाद ये पहली बार होगा जब सदन में विपक्ष तो होगा लेकिन बिखरा हुआ। तेजस्वी के साथ लेफ्ट के विधायक-विधानपार्षद तो होंगे लेकिन राज्य की दूसरी बड़ी विपक्षी और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस उनके साथ नहीं खड़ी दिखेगी। महागठबंधन विधायक दल की बैठक में नहीं शामिल होगी कांग्रेस- अजीत शर्मादरअसल बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है और ये 3 दिसंबर तक चलेगा। कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा से जब ये सवाल पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी महागठबंधन के विधायकों की बैठक शुरू होने से पहले या शीतकालीन सत्र के पहले दिन भाग लेगी? अजीत शर्मा ने कहा कि 'कांग्रेस की एक पुरानी परंपरा रही है कि वह सदन के सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर चर्चा करने और तय करने के लिए अपने विधायक दल की बैठक आयोजित करती है।' जाहिर है कि अजीत शर्मा ने क्लीयर कर दिया कि बिहार कांग्रेस तेजस्वी की अगुवाई वाली किसी बैठक में हिस्सा नहीं लेनेवाली। उपचुनाव में खिंची थी तलवारतारापुर और कुशेश्वर अस्थान विधानसभा सीटों के लिए हाल ही में हुए उपचुनावों के दौरान ही कांग्रेस ने खुद को अघोषित तौर पर महागठबंधन से अलग कर लिया था। 19 MLA वाली कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा कि 'कांग्रेस न तो महागठबंधन की पंजीकृत सदस्य है और न ही इसमें बने रहने के लिए किसी समझौते में है। हालांकि, हम भाजपा के विरोध में हैं, हम विपक्ष में हैं।' इस बारे में जब RJD के विधायक भाई वीरेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सदन में विपक्षी दलों के बीच पूर्ण समन्वय होगा। ये अलग बात है कि आरजेडी के दावे के बावजूद सदन में विपक्षी दलों के बीच कैसा समन्वय होगा, उसकी झलक कांग्रेस के रुख से साफ हो गई है। हालांकि कांग्रेस के अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक इस सारे फसाद की जड़ में तेजस्वी के जिद्द वाले फैसले हैं, जिसमें वो सहयोगियों की राय लेना भी उचित नहीं समझते।


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