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...तो क्या प्लेन से कानपुर पहुंचा जीका! शुरू में हर कोई था अनजान, फिर कैसे आया पकड़ में?

कानपुर केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में के कुछ केस मिलने के बाद अक्टूबर में अचानक कानपुर में इस दुर्लभ वायरस का एक केस मिला। हर क...

कानपुर केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में के कुछ केस मिलने के बाद अक्टूबर में अचानक कानपुर में इस दुर्लभ वायरस का एक केस मिला। हर कोई जीका की कानपुर में मौजूदगी से चौंका। लेकिन इस पूरे प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू है। कानपुर का स्वास्थ्य विभाग किसी वायरस की मौजूदगी से अनजान था। एयरफोर्स ने अपने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एक अधिकारी के नमूनों की एनआईवी पुणे से जांच कराई और जीका के सक्रिय होने का पता चला। कानपुर में कोविड ने जमकर कहर बरपाया था। अगस्त-सितंबर में शहर के कई इलाकों में मौसमी बुखार और डेंगू के केस भारी संख्या में सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाली मलेरिया नियंत्रण यूनिट के पास मच्छरों की निगरानी का काम था, लेकिन शहर में मच्छरों के बेतहाशा प्रकोप के बावजूद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। कानपुर मंडल के अपर निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. जीके मिश्रा के अनुसार, अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में अपने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पुणे के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी में जांच करवाई तो जीका की मौजूदगी पता चली। इसके बाद सर्वेलंस का दायरा बढ़ाया गया तो नए केस सामने आने शुरू हुए। आखिर कानपुर में कैसे आया जीका? कानपुर में जीका के स्त्रोत का अब तक पता नहीं चला है। चकेरी एयरपोर्ट पर नागरिक विमानों के अलावा एयरफोर्स के विमानों की भी खूब आवाजाही होती है। माना जा रहा है कि एयरफोर्स के ही किसी विमान से गुजरात, महाराष्ट्र या केरल से संक्रमित मच्छर लगेज केबिन या यात्रियों के केबिन से कानपुर पहुंच गए। इसके बाद संक्रमण की चेन बढ़नी शुरू हुई। दूसरी आशंका इस बात की है कि कोई आम व्यक्ति या एयरफोर्स कर्मी संक्रमित होकर कानपुर पहुंचा और मच्छरों के काटने से वायरस का प्रसार हो गया। अडिश्नल डायरेक्टर डॉ. जीके मिश्रा के अनुसार, किसी विमान से किसी संक्रमित मच्छर के कानपुर पहुंचने की संभावना काफी कम है। वह कहते हैं कि जिस वायरस के देश में ही गिने-चुने केस मिले हैं, उसके कानपुर में सक्रिय होने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था। मौसम बनेगा मददगार डॉ. मिश्रा के अनुसार, इस बार बरसात का मौसम मध्य अक्टूबर तक चला। वरना आमतौर पर बारिश सितंबर के बाद नहीं होती। इससे मच्छरों का प्रजनन बढ़ गया। इस स्थिति ने आग में घी का काम किया। लेकिन राहत की बात यह है कि नवंबर के शुरुआती दिनों में ही सर्दियों का मौसम आ गया है। तापमान लगातार गिरने से प्राकृतिक रूप से मच्छरों का प्रजनन खत्म होगा और वायरस का प्रसार रुकेगा। 20 नवंबर के आसपास नए केस थमने की पूरी संभावना है। कानपुर से कन्नौज तक पहुंचा जीका जीका वायरस ने कानपुर के बाद अब कन्नौज तक पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। शनिवार और रविवार को दोनों जिलों में कुल 11 नए केस सामने आए। कानपुर में मच्छरजनित वायरस के 89 केस सामने आ चुके हैं। जिला प्रशासन ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया है कि अब तक करीब 3500 नमूने भी लिए जा चुके हैं। कानपुर में 10 नए केस जीका विषाणु के हॉटस्पॉट बने चकेरी क्षेत्र में रविवार को 10 नए केस सामने आए। राहत की बात यह है कि नए केस एयरफोर्स स्टेशन के आसपास ही मिल रहे हैं। इस बीच कन्नौज में भी एक जीका पॉजिटिव केस मिला है। कानपुर मंडल के अडिश्नल डायरेक्टर (स्वास्थ्य) डॉ. जीके मिश्रा के अनुसार, कन्नौज में मिले पीड़ित की कानपुर की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है। वह कन्नौज सीमा से सटे शिवराजपुर क्षेत्र में आया था। डॉ. जीके मिश्रा ने बताया कि चकेरी क्षेत्र से मच्छरों और लार्वा के 50 नमूने लेकर इन्हें जांच के लिए दिल्ली भेजा गया था। वहां से आई रिपोर्ट में एक मच्छर के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। जीका के लक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जीका संक्रमित 60-80 प्रतिशत मरीज या तो लक्षणविहीन होते हैं या मामूली लक्षण जैसे हल्का बुखार, चकत्ते और मांसपेशियों में दर्द से पीड़ित होते हैं। - कुछ दुर्लभ केसों में यह वायरस दिमाग या स्नायु तंत्र (न्यूरो) को नुकसान पहुंचा सकता है। - कुछ मामलों में गुलियन बैरी सिंड्रोम भी हो सकता है। - यह दुर्लभ सिंड्रोम भी तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। - जीका संक्रमित गर्भवती महिलाओं को गर्भपात का खतरा हो सकता है। - नवजात शिशु को जन्मजात मस्तिष्क विकार माइक्रोसिफली हो सकता है। ऐसे करें बचाव - अपने घर, दफ्तर या कहीं भी पानी इकट्ठा न होने दें। - संक्रमित मच्छर दिन या शाम के शुरुआती घंटों में काट सकता है। - सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल जरूर करें। - जीका संक्रमित स्त्री-पुरुष सेक्स करने से बचें।


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