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वाराणसी में खिड़किया घाट बना नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन, अस्सी से राजघाट तक गंगा दर्शन गैलरी

विकास पाठक, वाराणसी दुनियाभर से काशी को निहारने आने वाले पर्यटकों को तस्‍वीर काफी कुछ बदली दिखेगी। यहां अर्धचंद्राकार घाटों की शृंखला के ...

विकास पाठक, वाराणसी दुनियाभर से काशी को निहारने आने वाले पर्यटकों को तस्‍वीर काफी कुछ बदली दिखेगी। यहां अर्धचंद्राकार घाटों की शृंखला के अंतिम छोर पर स्थित को नए टूरिस्‍ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का काम अंतिम दौर में है। इस घाट पर हेलिकॉप्‍टर उतरेंगे तो पर्यटकों को हाईटेक सुविधाएं मिलेंगी। इसी के साथ अस्‍सी से रविदास घाट तक बनाने का काम शुरू होने वाला है। इन्‍क्रेडिबल इंडिया (अतुल्‍य भारत) के पन्‍नों में जगह बनाने वाले देव दीपावली के अनूठे उत्‍सव में वर्ष 2020 में पहली बार शामिल हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने खिड़किया घाट से ही गंगा किनारे उतर कर 'देवलोक' जैसे बनारस का नजारा देखा था। इसी के साथ ही खिड़किया घाट को आधुनिक सुविधाओं वाला पर्यटकों के लिए घाट बनाने का प्‍लान तैयार कर उसे अमली जामा पहनाने पर काम शुरू हुआ। पहले चरण का काम दिसंबर महीने में पूरा हो जाएगा। करीब 11.5 एकड़ में 35 करोड़ की लागत से 600 मीटर लंबा घाट गाबियन और रेटेशन वॉल से तैयार किया गया है। यानी देखने में यह काशी के पुराने घाटों की तरह होगा और बाढ़ में सु‍रक्षित रहेगा। यहां 1.6 एकड़ एरिया में बहुउद्देशीय प्‍लैटफार्म दूसरे चरण में अगले साल मार्च तक बनकर तैयार होने पर एक समय में दो हेलिकॉप्‍टर उतर सकेंगे। इस प्‍लैटफार्म को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि सांस्‍कृतिक कार्यक्रम के उपयोग में भी लाया जा सकेगा। वाराणसी मंडल के कमिश्‍नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि मॉडल मिनी टर्मिनल के रूप में विकसित होने वाला खिड़किया घाट जल, थल और नभ से जुड़ा होगा। देव दीपावली जैसे अवसरों पर क्राउड मैनेजमेंट में बेहद उपयोगी साबित होगा। पास के ही राजघाट और भैंसासुर घाट का भी जीर्णोद्धार कर खिड़किया घाट से जोड़े जाने से काशी के प्रमुख घाटों की शृंखला में खिड़किया घाट भी शामिल हो जाएगा। सभी सुविधाएं एक जगह काशी के ज्‍यादातर घाटों पर वाहनों से पहुंचना संभव नहीं होता है, लेकिन खिड़किया घाट पर एयरपोर्ट व रेलवे स्‍टेशन से भी सीधे गाड़ियां आसानी से पहुंच पाएंगी। यहां पार्किंग की व्‍यवस्‍था की गई है। फूड प्‍लाजा, आरओ प्‍लांट, हैंडिक्रॉफ्ट उत्‍पाद बेचने के लिए शिल्पियों के लिए अलग जगह के साथ यहां वह सारी सुविधाएं एक जगह मिलेंगी, जिसके लिए पर्यटकों को अब तक भटकना पड़ता है। पर्यटक यहां वाटर स्‍पोर्ट्स का मजा ले सकेंगे तो काशी विश्‍वनाथ मंदिर में दर्शन का टिकट भी मिलेगी। लाइब्रेरी, मॉर्निंग वॉक, योग और मेडिटेशन केंद्र का भी निर्माण हो रहा है। जेटी से बोट द्वारा पर्यटक नौकाविहार कर घाटों का नजारा देखने के साथ काशी विश्‍वनाथ धाम भी जा सकेंगे। गंगा को प्रदूषण मुक्‍त करने के लिए सीएनजी से चलने वाली नावों के लिए सीएनजी स्‍टेशन भी खिड़किया घाट पर ही खोला गया है। सैलानियों के लिए गंगा दर्शन गैलरी अविरल गंगा को निहारने काशी आने वाले सैलानियों के लिए अस्सी से रविदास घाट के बीच गंगा वीईंग गैलरी बनाने का प्‍लान है। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की इस परियोजना को लोक निर्माण विभाग ने हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना के तहत अस्‍सी घाट पर पर्यटकों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए अब रविदास घाट को उसके समानांतर तैयार किया जाएगा और वहां तक पहुंचने की दूरी कम करने को गंगा किनारे ही बाढ़ के उच्‍चतम बिंदु के ऊपर से पाथवे का निर्माण होगा। 300 मीटर लंबे इस पाथवे से सैलानी गंगा की जलधारा और राजघाट तक के घाटों को निहार सकेंगे। 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पाथवे पर सैलानियों के लिए लाइट, बैठने आदि की व्यवस्था होगी। इसके अलावा पाथवे को जोड़ती हुई 2.5 हेक्टेयर जमीन पर 75 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटकों के लिए तमाम सुविधाएं विकसित होंगी।


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