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Jheeram Ghati News : रिपोर्ट आने के बाद बघेल ने बढ़ाया आयोग का कार्यकाल, दो नए जजों की नियुक्ति, बीजेपी ने पूछा- विचलित क्यों?

रायपुर छत्तीसगढ़ में जीरम घाटी नक्सली हमला को लेकर राजनीति तेज हो गई है। सरकार ने मामले की जांच के लिए गठित आयोग में नए अध्यक्ष समेत दो न...

रायपुर छत्तीसगढ़ में जीरम घाटी नक्सली हमला को लेकर राजनीति तेज हो गई है। सरकार ने मामले की जांच के लिए गठित आयोग में नए अध्यक्ष समेत दो नए सदस्यों की नियुक्ति की है। आयोग छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य शासन को सौपेंगा। जीरम घाटी नक्सली हमले की जांच कर रहे आयोग ने इस महीने की छह तारीख को जांच रिपोर्ट राज्यपाल अनुसुईया उइके को सौंप दी थी। सरकार ने अधिसूचना जारी करके जीरम घाटी नक्सली हमले की जांच कर रहे आयोग में दो नए सदस्य- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश के अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति जी मिन्हाजुद्दीन की नियुक्ति की है। न्यायमूर्ति अग्निहोत्री इस आयोग के अध्यक्ष होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जीरमघाटी क्षेत्र में 25 मई 2013 को घटित नक्सली हिंसा की जांच के लिए एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। अधिसूचना में कहा गया है कि जांच आयोग के सचिव ने इस वर्ष 23 सितंबर को अवगत कराया गया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए समय वृद्धि की जाए। न्यायिक जांच आयोग का कार्यकाल दिनांक 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है। इसके अनुसार आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार मिश्रा स्थानांतरित होकर मुख्य न्यायाधीश आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पदभार ग्रहण कर चुके हैं। इसलिए राज्य शासन द्वारा जांच आयोग में दो नए सदस्य नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। नए बिंदुओं को किया गया शामिल अधिसूचना के अनुसार राज्य शासन ने जांच में नए बिंदुओं को शामिल किया है। इन बिंदुओं में- क्या घटना के बाद पीड़ितों को समुचित चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी, ऐसी घटनाओं की पुनवृत्ति को रोकने के लिए क्या समुचित कदम उठाए गए थे और अन्य बिंदु माननीय आयोग या राज्य शासन के पारिस्थितिक आवश्यकतानुसार निर्धारित किया जाएगा। सरकार की तरफ से कहा गया है कि राज्य सरकार इस लोक महत्व के विषय की विशेष जांच के लिए दो सदस्य न्यायिक जांच आयोग में नियुक्त करता है, जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति सतीश के अग्निहोत्री होंगे और न्यायमूर्ति जी मिन्हाजुद्दीन इस आयोग के सदस्य होंगे। अधिसूचना के अनुसार आयोग अपनी जांच इस अधिसूचना की प्रकाशन की तारीख से छह माह के भीतर पूरी करेगा और राज्य शासन को रिपोर्ट सौंपेगा। क्या है मामला दरअसल, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जीरम घाटी में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था। इस हमले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। जीरम घाटी नक्सली हमले के बाद बीजेपी की सरकार ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। आयोग ने इस महीने की छह तारीख को जांच रिपोर्ट राज्यपाल अनुसुईया उइके को सौंप दी थी। न्यायाधीश मिश्रा वर्तमान में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं। जांच आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपे जाने को लेकर राज्य सरकार ने इस पर असंतोष जताया था और इसे स्थापित परंपरा के विपरीत बताया था। सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि जीरम घाटी घटना के बाद राज्य सरकार ने 28 मई 2013 को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया और जांच के बिंदु भी तय किए गए थे। उन्होंने कहा कि अधिसूचना के अनुसार तीन महीने के भीतर में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, उस समय से लेकर अब तक लगभग 20 बार समय बढ़ाया गया है। बघेल ने कहा था कि इस वर्ष सितंबर माह में आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के लिए समय मांगा गया था। उन्होंने कहा कि इस बीच न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा का स्थानांतरण आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ। इसलिए विधि विभाग से अभिमत मांगा गया था कि जांच पूरी नहीं हुई है और जो न्यायाधीश जांच कर रहे थे, उनका स्थानांतरण हो गया है, तब ऐसी स्थिति में हम क्या कर सकते हैं। सीएम ने कहा था कि इसका अर्थ यह हुआ कि जांच पूरी नहीं हुई थी, समय में वृद्धि करने की मांग आयोग के सचिव की ओर से ही आई थी। उन्होंने कहा कि इस बीच समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि राज्यपाल को यह रिपोर्ट सौंप दी गई है। हमें राजभवन से इसकी जानकारी नहीं मिली है। भूपेश बघेल ने कहा कि आयोग ने अंतिम अवसर के लिए समय मांगा और दूसरी ओर रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी गई, यह विरोधाभास है। वह भी रिपोर्ट को मान्य परंपरा के विपरीत राज्यपाल को सौंपा गया है। बघेल ने बुधवार को संकेत दिया था कि सरकार इस मामले की जांच के लिए नए आयोग का गठन कर सकती है। बीजेपी ने साधा निशाना वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि जीरम मामले में राज्यपाल अनुसुइया उईके को जांच प्रतिवेदन सौंपे जाने के बाद कांग्रेस और प्रदेश सरकार की बौखलाहट और एक नए जांच आयोग के गठन की घोषणा से यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार इसे लेकर विचलित है। उन्होंने कहा कि जांच आयोग ने अपना प्रतिवेदन सरकार के बजाए यदि राज्यपाल को सौंपा है तो प्रदेश सरकार इतना बिफर क्यों रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाते मौजूदा सीएम भूपेश बघेल ने जीरम मामले के सबूत जेब में रखने की बात कही थी लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्होंने सबूत पेश नहीं किया।


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