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कहानी UP की: जब नाना देशमुख के कहने पर फारूक अब्दुल्ला ने दिया था अटल सरकार को समर्थन, फिर भी...

पंकज मिश्रा, हमीरपुर उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र में सत्ता संघर्ष में शीर्ष राजनीति के ईमानदार नेता के लिए कई महान विभूतियों का ना...

पंकज मिश्रा, हमीरपुर उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र में सत्ता संघर्ष में शीर्ष राजनीति के ईमानदार नेता के लिए कई महान विभूतियों का नाम श्रद्धा के साथ लिया जाता है। इनमें एक ऐसे कर्मयोगी हैं जिन्होंने केन्द्र में की सरकार को बचाने के लिए फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की थी लेकिन ईमानदारी के कारण एक वोट से अटल सरकार की विदाई हो गई थी। इस सियासी उठापटक में नाना देशमुख बहुत दुखी हुए थे। दोबारा सत्ता में आने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने नाना देशमुख के यहां आकर प्रवास किया था। इस सियासी खेल को लेकर ग्रामोदय दर्शन आश्रम के प्रभारी ने पूरी कहानी बताते हुए कहा कि देश की राजनीति में अटल ने ईमानदारी से अविश्वास प्रस्ताव का सामना करते हुए अपनी सरकार मात्र एक वोट से गवां दी थी। साल 1990-91 में नाना देशमुख ने बुंदेलखंड के चित्रकूट में आकर समाजसेवा का काम शुरू किया था। उन्होंने एमपी सरकार के तत्कालीन सीएम सुन्दरलाल पटवा से बात कर यहां के लोगों को स्वावलम्बी बनाने के लिए मदद मांगी थी। कर्वी के गनीवां गांव में 9 मई 1990 को 160 एकड़ भूमि दीनदयाल शोध संस्थान को दी गई। नाना देशमुख ने साल 2005 तक 80 गांवों तथा जनवरी 2009 तक पांच सौ गांवों को स्वावलम्बी बनाया। गरीब बच्चों की शिक्षा और दबे कुचले लोगों की खुशहाली के लिए भी तमाम योजनाएं चलाई गईं। नाना देशमुख की शीर्ष राजनीति में मजबूत पैठ थी इसीलिए अटल बिहारी बाजपेई समेत तमाम बड़े राजनेता उनसे मिलने चित्रकूट आते थे। अटल और नाना देशमुख में हुई थी लम्बी बातचीत नाना देशमुख के ग्रामोदय दर्शन आश्रम में कई साल तक प्रभारी रहे हमीरपुर जिले के राठ निवासी केके गुप्ता ने रविवार को बताया कि केन्द्र में पहली मर्तबा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी। तभी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अटल का फोन नाना देशमुख के लिए आया था। तब नाना देशमुख को नींद से जगाकर बात कराई गई थी। एक वोट से अटल सरकार गिरने पर दुखी हुए थे नाना देशमुख नाना देशमुख ने तुरंत फारूक अब्दुल्ला को संदेश भिजवाकर अटल सरकार को समर्थन देने के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि अगले ही दिन अखबार में फारूक अब्दुल्ला के समर्थन देने की खबर भी आई थी। फिर भी एक वोट से सरकार चली गई। उन्होंने बताया कि मात्र एक वोट से अटल सरकार के जाने से नाना देशमुख दुखी हुए थे। उन्होंने कहा था कि ईमानदारी के कारण ही अटल दोबारा सत्ता में आए थे। अगर उनकी जगह पर और कोई राजनेता होता अविश्वास प्रस्ताव पारित भी नहीं हो पाता। नाना देशमुख, अटल ने मिलकर की जनसंघ की स्थापना केके गुप्ता बीजेपी के बहुत पुराने जमीनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि नाना देशमुख और अटल बिहारी वाजपेयी परम मित्र थे। शुरूआत में इन दोनों ने मिलकर जनसंघ की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि अटल जैसा कोई और व्यक्तित्व का धनी नेता आज के जमाने में नहीं हो सकता है। 19 साल पूर्व नाना देशमुख के यहां अटल ने किया था प्रवास केके गुप्ता ने बताया कि दोबारा पीएम बनने के बाद 27 मार्च 2003 को अटल बिहारी वाजपेयी चित्रकूट आकर नाना देशमुख के यहां प्रवास किया था। उन्होंने मिनी वाटरसेड कृषि विज्ञान केन्द्र और दीनदयाल शोध संस्थान का लोकार्पण किया था। अगले दिन अटल ने तुलसी कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां का उद्घाटन करने के बाद वहां कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में मार्मिक बातें कही थीं।


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