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यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे 693 मेडिकल स्टूडेंट पोलैंड के रास्ते दिल्ली पहुंचे, इनमें 47 राजस्थानी

रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर: रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद वहां फंसे भारतीय को निकालने का सिलसिला जारी है। 10 मार्च गुरुवार देर शाम को यूक्र...

रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर: रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद वहां फंसे भारतीय को निकालने का सिलसिला जारी है। 10 मार्च गुरुवार देर शाम को यूक्रेन के सूमी में फंसे (Indian students evacuated from Ukraine's Sumy) करीब 700 मेडिकल स्टूडेंट्स को वहां निकाला गया। इनमें राजस्थान के 47 स्टूडेंट्स शामिल हैं। इन सभी को सड़क मार्ग के जरिए सूमी से पोलैंड बॉर्डर तक लाकर बॉर्डर पार करवाया गया। बाद में पोलैंड एयरपोर्ट से फ्लाइट के जरिए इन्हें दिल्ली के लिए रवाना किया गया। इस दौरान भारतीय राजदूत भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सूमी शहर से सभी स्टूडेंट्स को सुरक्षित निकाल लिया गया है। कई दिनों तक भूमिगत तहखानों में छिपे रहे मेडिकल स्टूडेंट्स यूक्रेन के सूमी शहर के पास रूसी सेना ने धावा बोल दिया था। पिछले कई दिनों से वहां लगातार बमबारी जारी है। अपनी जान बचाने के लिए सूमी में फंसे भारतीय छात्र-छात्राएं भूमिगत तहखानों में छिपे रहे। फरवरी के अंतिम दिनों में सूमी में फंसे छात्र-छात्राओं ने फायरिंग और बमबारी से जुड़े कुछ वीडियो भी भारतीय अधिकारियों के भेजे। जल्द से जल्द उन्हें वहां से निकालने की गुहार की गई। भारतीय दुतावास से जुड़े अधिकारियों ने दो दिन पहले इन छात्रों को निकालने का प्रयास किया लेकिन रास्ते में बमबारी और फायरिंग के चलते वापस लौटना पड़ा। आखिर गुरुवार रात को छात्र-छात्राओं को सुरक्षित निकाल लिया गया। 5 मेडिकल स्टूडेंट्स अभी भी फंसे हैं खरसान शहर में जानकारी मिली है कि 5 मेडिकल स्टूडेंट्स अभी भी खरसान शहर में फंसे हुए हैं। दो छात्राएं हरियाणा की रहने वाली है, 2 छात्र गुजरात के रहने वाले हैं और एक छात्र तमिलनाडू का रहने वाला है। ये पांचों स्टूडेंट्स लगातार गुहार कर रहे हैं कि उन्हें भी वहां से सुरक्षित निकाला जाए। मालूम चला है कि खरसान शहर पर रूस ने कब्जा कर लिया है। ऐसे में इन मेडिकल स्टूडेंट्स का बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है। चर्मेश शर्मा लगातार मेडिकल स्टूडेंट्स की मदद में जुटे हैं राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले और विदेश मामलों के जानकार चर्मेश शर्मा यूक्रेन में फंसे मेडिकल स्टूडेंट्स की मदद में जुटे हुए हैं। रूस द्वारा हमला करने से पहले ही चर्मेश शर्मा ने राष्ट्रपति सचिवालय, मानवाधिकार आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय को हमले की आशंका जताते हुए भारतीय छात्रों को निकालने की गुहार लगाई थी। हमला होने के बाद से यूक्रेन में फंसे सैंकड़ों छात्रों ने चर्मेश शर्मा से मदद मांगी। चर्मेश शर्मा लगातार मानवाधिकार आयोग के जरिए केन्द्र सरकार पर यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे छात्रों के बचाने के लिए दबाव बनाते रहे। सूमी शहर में फंसे हजारों भारतीयों को निकालने के लिए चर्मेश शर्मा ने 2 मार्च को मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। 8 मार्च को आयोग ने केस दर्ज किया। आखिर 10 मार्च को करीब 700 स्टूडेंट्स को सुरक्षित निकाल लिया गया। अब खरसान में फंसे 5 छात्रों के लिए भी चर्मेश द्वारा मानवाधिकार आयोग को पत्र लिख कर मदद मांगी जा रही है।


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