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यति नरसिंहानंद सरस्वती: जानें मेरठ के दीपक त्यागी का महामंडलेश्वर बनने तक का सफर

गाजियाबाद अपने सांप्रदायिक बयानों से विवादों में रहने वाले गाजियाबाद के डासना मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती को जूना अखाड़े का मह...

गाजियाबाद अपने सांप्रदायिक बयानों से विवादों में रहने वाले गाजियाबाद के डासना मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती को जूना अखाड़े का महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। उन्होंने श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि से संन्यास की दीक्षा पूरी कर ली है। दीक्षा के बाद अब यति नरसिंहानंद सरस्वती से गिरी हो गए हैं। यति नरसिंहानंद का जूना अखाड़े में प्रवेश ऐसे वक्त पर हुआ है जब महज एक हफ्ते पहले ही उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के 10 साल के बच्चे की तुलना एक ट्रेंड किलर से कर डाली थी जो घूमता हुआ गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के परिसर में आ गया था। यति नरसिंहानंद का आरोप था कि उसे मंदिर की रेकी करने के लिए भेजा गया था। डासना मंदिर में हुई थी मुस्लिम बच्चे की पिटाई हालांकि पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि बच्चा मंदिर से लगे हुए हेल्थ सेंटर की ओर जा रहा था लेकिन अपना रास्ता भटककर मंदिर में आ गया था। अल्पसंख्यक समुदाय से ही एक दूसरा लड़का जो इसी साल मार्च महीने में मंदिर में पानी पीने आया था, उसे यति के साथियों ने पीटा था। यति डासना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी हैं। मंदिर में बैनर लगाया गया है कि यहां मुस्लिमों का प्रवेश निषेध है। संन्यास धारण करने से पहले दीपक त्यागी नाम था मेरठ में जन्मे यति नरसिंहानंद साल 2007 से डासना देवी के पुजारी हैं। संन्यास धारण करने से पहले उनका नाम दीपक त्यागी था। बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर दीपेंद्र नारायण सिंह कर लिया था। उसके बाद वह यति नरसिंहानंद सरस्वती हो गए। यति के मित्र अनिल यादव बताते हैं, '1998 में वह बीजेपी के बीएल शर्मा से मिले थे जिन्होंने उन्हें एक व्यक्ति के रूप में बदला।' मॉस्को में केमिकल इंजीनियरिंग का कोर्स यति ने हापुड़ के चौधरी तारा चंद इंटर कॉलेज से पढ़ाई की। वह दावा करते हैं कि वह 1989 में केमिकल टेक्नॉलजी के कोर्स के लिए मॉस्को गए थे। यति के अनुसार, वह 1994 में ग्रैजुएट हुए और 1997 में भारत लौटने से पहले इंजीनियर के रूप में काम किया। मां के बीमार पड़ने पर वह भारत लौट आए। यति बताते हैं कि उनके पिता केंद्र सरकार के कर्मचारी रह चुके हैं और उनके दादा कांग्रेस से जुड़े थे। भारत लौटने के बाद यति समाजवादी पार्टी से जुड़ गए थे। हालांकि स्थानीय समाजवादी पदाधिकारियों को इस बारे में जानकारी नहीं है।


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