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घुट रहा था दम, बेसुध होकर गिरे, घुटने के बल चले... भोपाल में 36 जिंदगियों को बचाने वाले 'वीरों' की कहानी

भोपाल अस्पताल () के वार्ड में शॉर्ट सर्किट की वजह से धुआं भर गया था। धुआं की वजह से किसी को कुछ नहीं दिख रहा था। बच्चे वार्ड के अंदर घूंट...

भोपाल अस्पताल () के वार्ड में शॉर्ट सर्किट की वजह से धुआं भर गया था। धुआं की वजह से किसी को कुछ नहीं दिख रहा था। बच्चे वार्ड के अंदर घूंट रहे थे। उनकी देखभाल के लिए लगे वार्ड बॉय और नर्स लाचार नजर आ रहे थे। मगर अपनी जान की परवाह किए बिना वह उनकी जिंदगी बचाने में जुटे थे। अस्पताल में आग के बाद 40 में से 36 बच्चों की जान बची है। इसमें कई लोग देवदूत बनकर आए हैं। इन देवदूतों में एमपी सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी हैं। कमला नेहरू अस्पताल में आग सोमवार की रात 8.35 बजे लगी थी। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री यहां से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही वह अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल पहुंचने के बाद वह बच्चों की जिंदगी बचाने में खुद लग गए। साथ ही उस वार्ड से निकालकर उनका इलाज कहां करवाया जाए। इसकी व्यवस्था करने लगे। स्ट्रेचर से बच्चों को खुद निकाले अस्पताल के कर्मियों की मदद से विश्वास सारंग एक स्ट्रेचर पर करीब आठ बच्चों को लेकर निकले। उनके साथ अस्पताल के कर्मी अपने कंधों पर ऑक्सिजन सिलेंडर लिए हुए थे। सभी को दूसरे वार्डों में इलाज के लिए शिफ्ट किया गया। सोमवार को देर रात तक वह अस्पताल में रहे। मंगलवार को थोड़ी देर के लिए घर गए। इसके बाद फिर मंत्री विश्वास सारंग अस्पताल में पहुंचकर व्यवस्थाओं को देखने लगे। अपनी जान की लगा दी बाजी वहीं, जिंसी के मोहम्मद आमिर ने बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। आमिर अपने बच्चे को पहले निकालकर ऊपर की ओर भागे। डॉक्टर और दूसरे स्टॉफ के साथ मिलकर उन्होंने दूसरे बच्चों को बचाने में मदद की। वार्ड से धुआं निकालने के लिए आमिर ने कांच तोड़े। नवभारत टाइम्स. कॉम से बात करते हुए आमिर ने कहा कि मेरे मन में उस वक्त ख्याल आया है कि अगर बच्चों को कुछ हो गया तो मैं अल्लाह को क्या जवाब दूंगा। यह सोचकर आमिर ने अपनी जान को दांव पर लगा दिया। आग पर ऐसे पाया काबू वहीं, धुआं होने की वजह से आग बुझाने में फायरकर्मियों को भी दिक्कत हो रही थी। फायरकर्मी अदनान वार्ड की दीवार तोड़कर अपने साथियों के साथ तीसरी मंजिल तक पहुंचे। धुआं की वजह से बहुत अंधेरा था, साथ ही दम भी घुट रहा था। इसकी वजह से रफ्तार धीमी पड़ी। आमिर फिर घुटने के बल आगे बढ़े। वहां पहुंचे तो एक नर्स बेसुध पड़ी थी। पहले उसे वहां से निकाले। इसके बाद बचाव में लग गए। बच्चों को बचाते-बचाते हुए बेसुध अस्पताल में मौजूद डॉक्टर और कर्मचारी जी जान से बच्चों की जिंदगी बचाने में लग गए थे। नर्सिंग कर्मचारी राजेश राजा ने भी अपनी परवाह नहीं की। वह बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। राजेश ने चार बच्चों को वार्ड से निकालकर दूसरे वार्ड में शिफ्ट की। इसके बाद खुद बेसुध होकर गिर गई।


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