Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

Breaking News:

latest

भारत श्री सम्मान

भारत श्री सम्मान
आप के योगदान को देता है , समुचित सम्मान एवं कार्य क्षेत्रों को देता है नया आयाम। "भारत श्री सम्मान" । आज ही आवेदन करें । कॉल एवं व्हाट्सएप : 9354343835.

जाति ही नहीं धर्म के मुद्दे पर भी BJP को घेर रहे अखिलेश, OBC जनगणना के बाद चला अक्षयवट का 'कार्ड'

लखनऊ 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कमर कस ली है। अपने भाषणों और रैलियों में...

लखनऊ2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कमर कस ली है। अपने भाषणों और रैलियों में वह केंद्र और यूपी सरकार दोनों पर ही हमलावर हैं। पिछले 2-3 महीनों के उनके भाषणों को देखें तो पाएंगे कि कैसे वह किसानों के मुद्दों, बेरोजगारी, महंगाई से लेकर जाति-धर्म तक के मुद्दों पर बीजेपी को चौतरफा घेर रहे हैं। हाल ही में पिछड़ों की जनगणना की मांग करने वाले अखिलेश ने अब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को निशाने पर लिया है। बीजेपी जिस काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को अपनी एक बड़ी उपलब्धि बता रही है, अखिलेश ने उस पर निशाना साधते हुए कहा कि काशी में अक्षयवट को आघात पहुंचाने वालों का क्षय निश्चित है। लापरवाही की भेंट चढ़ा काशी का अक्षयवटविश्‍वनाथ धाम परिसर के हनुमान मंदिर में स्थित अक्षयवट बीते अप्रैल महीने में धाराशायी हो गया था। मंदिर के महंत नील कुमार मिश्रा और बच्‍चा पाठक का आरोप है कि विश्‍वनाथ धाम का निर्माण करा रही पीएसपी कंपनी की लापरवाही से अक्षयवट वृक्ष ढह गया। कुछ महीने पहले ही वन विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान वृक्ष को संरक्षित करने की बात कही थी, लेकिन किसी ने उस ओर ध्‍यान नहीं दिया। दो महीने पहले धाम की फर्श पर मार्बल लगाने के दौरान अक्षयवट वृक्ष की जड़ और हनुमान जी के विग्रह को भी हटा दिया गया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देश में प्रयागराज और गया के अलावा काशी में ही अक्षयवट वृक्ष था। केंद्र का OBC जनगणना से इनकार, अखिलेश हमलावरइसके अलावा अखिलेश यादव केंद्र सरकार पर ओबीसी की जनगणना को लेकर भी हमलावर हैं। केंद्र के ओबीसी जनगणना से इनकार करने पर अखिलेश ने कहा, ‘धनबल की समर्थक सत्तारूढ़ पार्टी शुरू से ही सामाजिक न्‍याय की विरोधी है। बीजेपी सरकार ने लंबे समय से चली आ रही ओबीसी समाज की गणना की मांग को ठुकराकर साबित कर दिया है कि वह ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को गिनना नहीं चाहती है क्योंकि वह ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में उनका हक नहीं देना चाहती है।' दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ-पत्र दायर कर केंद्र सरकार ने कहा था कि पिछड़े वर्गों की जातीय गणना प्रशासनिक रूप से कठिन काम है। SP नेता बोले- डबल इंजन सरकार को चुनाव में मिलेगा जवाबइस बारे में बात करने पर समाजवादी पार्टी के विधायक और सदन में पार्टी के चीफ विप नरेंद्र सिंह वर्मा ने कहा, 'समाजवादी पार्टी हमेशा से ही सामाजिक न्याय की पैरोकार रही है। हमारी सरकार के पिछले कार्यकाल को ही देख लें, हमने प्रदेश का चौतरफा विकास किया...बिना किसी की जाति-धर्म देखे। यही सामाजिक न्याय हमारे मंत्रिमंडल में भी दिखा। बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने काशी विश्वनाथ धाम में विकास के नाम पर जो तबाही मचाई और सदियों पुराने मंदिरों और विरासतों को तोड़ा, वह मंजर इससे पहले कभी नहीं देखा गया। जनता इसका जवाब चुनाव में देने को पूरी तरह तैयार है।' अखिलेश ने क्यों की OBC जनगणना की मांग, राजनीति समझिएकुर्मी समाज के बड़े नेता बेनी प्रसाद वर्मा के जाने के बाद समाजवादी पार्टी में जो निर्वात पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं है। पार्टी के पास यूं तो प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, चीफ विप नरेंद्र सिंह वर्मा जैसे कई बड़े और प्रभावी कुर्मी नेता हैं, मगर सिर्फ इनको साथ रखकर चुनावी बैतरणी पार नहीं होनी है। यही वजह है कि अखिलेश ने हाल ही में जो राज्य कार्यकारिणी बनाई उसमें गैर यादव ओबीसी का ख्याल रखा गया है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर और अपना दल (के) की कृष्णा पटेल को भी साथ लिया है। दूसरी तरफ, ओबीसी जनगणना की मांग करना और केंद्र के इसे ठुकराने पर हमलावर होने के पीछे अखिलेश की रणनीति साफ है कि कैसे बीजेपी को 'ओबीसी विरोधी' साबित करके गैर यादव ओबीसी को अपने पाले में किया जाए। मुलायम के एम-वाई समीकरण से बिल्कुल जुदा अखिलेश की रणनीतिअखिलेश यादव ने इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए जो नारा दिया है उसी में उनकी बदली हुई रणनीति की झलक दिखती है। अखिलेश का 'नई हवा है, नई सपा है' का नारा पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के दौर के एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण से बिल्कुल जुदा है। इसी नारे पर चलते हुए वह न सिर्फ गैर यादव ओबीसी वोटरों को साधने की कोशिश में हैं बल्कि मुस्लिमों की 'पहली पसंद' होने की छवि से बाहर आकर काशी के अक्षयवट का मुद्दा भी उठा रहे हैं। अखिलेश को पता है कि उनका कोर वोटबैंक (मुस्लिम-यादव) पूरी तरह सुरक्षित है और अगर इसमें कुछ टूट-फूट होती है तो उसके लिए नए समीकरण भी बनाए जाएं।


from Hindi Samachar: हिंदी समाचार, Samachar in Hindi, आज के ताजा हिंदी समाचार, Aaj Ki Taza Khabar, आज की ताजा खाबर, राज्य समाचार, शहर के समाचार - नवभारत टाइम्स https://ift.tt/3xGoJim
https://ift.tt/3rtmWvU

No comments