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बिहार में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों की जा सकती है नौकरी, जानिए वजह

पटना : बिहार में पिछले कई साल से अलग-अलग स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे एक लाख से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी () पर खतरा मंडरा रहा है। जानका...

पटना : बिहार में पिछले कई साल से अलग-अलग स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे एक लाख से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी () पर खतरा मंडरा रहा है। जानकारी के मुताबिक, नियोजित शिक्षकों को वेरिफिकेशन के लिए ओरिजिनल सर्टिफिकेट जमा कराने के लिए कहा गया है, बावजूद इसके बड़ी संख्या में शिक्षकों ने डिटेल्स उपलब्ध (Bihar Teachers Recruitment) नहीं कराई है। जिसके चलते अब जल्द ही ऐसे शिक्षकों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन नहीं होने से मंडरा रहा खतरा शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पंचायती राज संस्थानों या शहरी निकायों में 2006 से 2015 के बीच नियुक्त सभी शिक्षकों को पिछले साल जून में शिक्षा विभाग के विशेष रूप से बनाए गए पोर्टल पर अपने मूल प्रमाण पत्र और मेरिट सूची अपलोड करने के लिए कहा गया था। हालांकि, विभाग की ओर से बार-बार जानकारी दिए जाने के बावजूद एक लाख से अधिक शिक्षकों ने अपने दस्तावेज अपलोड नहीं किए हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे में यह फैसला लिया गया है कि जिन शिक्षकों ने डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए हैं, हाईकोर्ट के संज्ञान में देकर इनकी सेवा समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। एक लाख से ज्यादा शिक्षकों ने नहीं सबमिट किए डॉक्यूमेंट्सविजय कुमार चौधरी ने बताया कि इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने 2016 में राज्य के सतर्कता विभाग की ओर से इन सभी शिक्षकों की भर्ती और उनके संबंधित प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के सत्यापन की जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद राज्य सतर्कता विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार 2016 में ही इस अवधि के दौरान नियुक्त लगभग 3.75 लाख शिक्षकों के प्रमाण पत्र की जांच करने का कार्य किया। वहीं पिछले साल जून तक करीब ढाई लाख शिक्षकों के सर्टिफिकेट फोल्डर ही सतर्कता विभाग को उपलब्ध कराये जा सके। हाईकोर्ट के निर्देश पर जा सकती है शिक्षकों की नौकरीविभाग ने बताया कि अब छह महीने से भी ज्यादा समय गुजरने के बावजूद लगभग 1 लाख से ज्यादा शिक्षकों ने अभी तक अपने पेपर अपलोड नहीं किए हैं। हालांकि, इन शिक्षकों को अपने प्रमाणपत्र फोल्डर वेबसाइट पर अपलोड करने का आखिरी मौका भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया है। ऐसे में शिक्षा मंत्री ने कहा कि मामले को उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। ऐसे सभी शिक्षकों की सेवाएं कोर्ट के निर्देश पर समाप्त की जा सकती हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों ने अपने सर्टिफिकेट फोल्डर उपलब्ध कराए हैं, उनमें से लगभग 10 से 15 फीसदी शिक्षकों ने कथित तौर पर फर्जी सर्टिफिकेट जमा किए हैं।


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