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झारखंड दुमका : तीर, कमान, बरछी, गंड़ासा के साथ सड़क पर उतरे आदिवासी... नंग धड़ंग लहराए परंपरिक हथियार, सरकार को दी चेतावनी

उत्तम आनंद, दुमका : संथाल परगना के मुख्यालय और उपराजधानी दुमका से सरकार के खिलाफ उलगुलान शुरू हो गया है । बताते चलें कि उलगुलान आदिवासियो...

उत्तम आनंद, दुमका : संथाल परगना के मुख्यालय और उपराजधानी दुमका से सरकार के खिलाफ उलगुलान शुरू हो गया है । बताते चलें कि उलगुलान आदिवासियों का शसस्‍त्र आंदोलन है। आदिवासियों ने 1932 के खतियान के आधार पर झारखंंड में स्थानीय नीति को लागू करने के लिए दुमका के एसपी कॉलेज से एक दर्जन संगठनों ने मिलकर जनाक्रोश रैली निकाली। जो सिद्धो कान्हू चौक होते हुए मुख्य बाजार बीरकुंवर सिंह चौक, तिलकामांझी चौक और फिर अम्बेडकर चौक पहुंचकर धरना में तब्दील हो गया। इस दौरान अपनी मांगों को लेकर आंदोलित आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक हथियारों के साथ उग्र प्रदर्शन किया। आदिवासी समाज पारंपरिक कपड़ों और तीर, कमान भाला, बरछी जैसे हथियारों को लेकर सड़क पर उतर आया। इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के लिए पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा भी धरना स्‍थल पर पहुंच गए। हेमंत सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोपजनाक्रोश रैली में वक्ताओं ने वर्तमान सरकार के वादाखिलाफी के विरोध में जमकर नारेबाजी की। उन्‍होंने कहा कि सरकार बनने के बाद हेमंत सोरेन घोषणा पत्र की बातों को भूल गए हैं। सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि हेमंत सोरेन के तीन बन्दर सरकार चला रहे हैं। बेसरा ने कहा कि यह स्थानीय नीति और नियोजन नीति लागू करने के लिए रैली निकाली गई है। बताते चलें कि उलगुलान में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। आदिवासियों का ये विराेध घंटों चला जिसकी वजह से आवागमन भी प्रभावित रहा। सरकार को दिया 25 मार्च तक का अल्टीमेटम अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे आदिवासी समाज के लोगों ने सरकार को चेताते हुए 25 मार्च तक का वक्‍त दिया है। विधानसभा सत्र के दौरान आदिवासियों ने कहा है कि अगर सरकार 1932 के आधार पर स्थानीय नीति को परिभाषित नहीं किया जाता तो आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन के बीच एक नेता ने कविता के माध्यम से सरकार की खिंचाई की तो, दुधानी पंचायत के मुखिया ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दुमका विधायक बसन्त सोरेन पर बालू कोयला पत्थर लूटने का भी आरोप लगाया ।


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