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और कितनी मौतें ? फायर सेफ्टी को लेकर अस्पतालों की लापरवाही, बीएमसी को नहीं भेजा आपदा प्रबंधन प्लान

मोफीद खान, मुंबई: अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं और मरीजों की जान जाने के बाद भी इनकी सेफ्टी को लेकर निजी से लेकर सरकारी अस्पताल तक उदास...

मोफीद खान, मुंबई: अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं और मरीजों की जान जाने के बाद भी इनकी सेफ्टी को लेकर निजी से लेकर सरकारी अस्पताल तक उदासीन हैं। बीते एक वर्ष में महज 10 फीसद अस्पताल वालों ने ही बीएमसी(BMC) डिजास्टर विभाग को अपना आपदा प्रबंधन प्लान सौंपा है। शेष अस्पतालों द्वारा रुचि नहीं दिखाई जाने पर बीएमसी अब इन्हें दोबारा नोटिस जारी करने वाली है। बता दें कि बीते 14 महीनों में मुंबई(Mumbai) सहित राज्य में 6 से अधिक अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं घट चुकी है। इसमें 55 लोगों की जानें जा चुकी हैं। अस्पतालों में होने वालीं इन अप्रिय घटनाओं को टालने के लिए बीएमसी प्रशासन ने सरकारी, बीएमसी और निजी अस्पतालों(Fire in Hospitals) को डिजास्टर प्लान तैयार करने का आदेश दिया था। इसके तहत 600 से अधिक अस्पतालों की सूची तैयार की गई थी, जिसमें से करीब 240 अस्पतालों को ईमेल के जरिए नोटिस दिया गया था। इन 240 में 180 बड़े और छोटे निजी अस्पताल शामिल थे। बीते वर्ष फरवरी में उक्त नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस के साथ बीएमसी ने डिजास्टर प्लान का मसौदा भी भेजा था। नोटिस को भेजे हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक सिर्फ 25 अस्पतालों ने डिजास्टर प्लान बीएमसी के आपदा प्रबंधन के पास सौंपा है। इन 25 अस्पतालों में 20 प्राइवेट अस्पताल, बीएमसी के 4 और एक सरकारी अस्पताल शामिल हैं, जिन्होंने मरीजों की सेफ्टी के प्रति रुचि दिखाई है और अस्पतालों में आपदा से निपटने के लिए बनाए गए प्लान को सौंपा है। क्या है आपदा प्लान? बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी ने बताया कि डिजास्टर प्लान को लेकर अस्पतालों को भेजे गए मसौदे में कई सवाल पूछे गए थे। इसमें अस्पतालों में आपदा के समय बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, अग्निरोधक यंत्र, यंत्रों को चलाने के लिए स्टाफ को ट्रेनिंग, मॉक ड्रील, हादसे के पहले सूचना प्रणाली आदि शामिल थे। इन मसौदे के आधार पर प्लान सौंपने का आदेश दिया गया था। उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों ने अभी तक प्लान नहीं सौंपा है, उन्हें दोबारा नोटिस जारी की जा रही है। इसके अलावा दमकल अधिकारी, स्थानीय वॉर्ड के मेडिकल अफसर और असिस्टेंट कमिश्नर को प्रत्यक्ष रूप से सूचीबद्ध अस्पतालों का निरीक्षण भी किए जाने की बात काकानी ने कही है।


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