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हरिद्वार में आश्रम के लिए पैसे कहां से, बाघम्बरी मठ से दूरी क्यों... जब CBI के सवालों पर छूटे आनंद के पसीने

प्रयागराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत की मौत के मामले में आरोपियों से सीबीआई ने मंगलवार को 7 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की...

प्रयागराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत की मौत के मामले में आरोपियों से सीबीआई ने मंगलवार को 7 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की। सीबीआई के अधिकारियों ने रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रहे आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी से सुबह साढ़े दस बजे से शाम करीब साढ़े छह बजे तक अलग-अलग पूछताछ हुई। बाघम्बरी गद्दी मठ में भी संदेह के घेरे में आए लोगों से मंगलवार को पूछताछ की गई। सीबीआई ने कथित वीडियो और सीडी के बारे में भी आनंद गिरि से पूछताछ की। आनंद गिरि सीबीआई के सवालों से कई बार असहज भी हुआ। इस दौरान आनंद गिरि बार-बार अपने निर्दोष होने की दुहाई भी देते रहे। FIR से पहले आखिर नरेंद्र गिरी की मौत पर क्यों दी सफाई? सीबीआई ने आनंद गिरि से यह पूछा कि उसे महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बारे में सबसे पहले जानकारी कब और किसने दी, जिसके बाद उसने एक वीडियो जारी कर सफाई भी दी थी, जबकि तब तक उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई थी। सीबीआई टीम ने आनंद गिरि से हरिद्वार में बन रहे उसके आश्रम के बारे में भी पूछताछ की। सीबीआई ने पूछा कि इसके निर्माण के लिए धन का इंतजाम कैसे और कहां से किया गया? सीबीआई ने आनंद गिरि से यह भी पूछा कि जब उसके गुरु से मतभेद के बाद समझौता हो गया था। इसके बावजूद वह बाघम्बरी गद्दी से दूर क्यों रहा? सीबीआई बुधवार को भी इन आरोपियों से पूछताछ जारी रखेगी। साक्ष्य जुटाने के लिए हरिद्वार जा सकती है टीम सीबीआई टीम बुधवार को साक्ष्य जुटाने के लिए आरोपियों को पुलिस लाइन गेस्ट हाउस से श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर भी ले जा सकती है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर सीबीआई आनंद गिरी को इन सात दिनों में कभी भी‌ हरिद्वार या किसी अन्य स्थान पर भी ले जा सकती है। वहीं सीएफएसएल की टीम मौके से जुटाए गए सबूतों का विश्लेषण करने के लिए सीएफएसएल लैब जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने अब तक जो भी सबूत इकट्ठे किए हैं उनका विश्लेषण वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा जिससे उन्हें अदालत में पेश किया जा सके। साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी भी करवाई गई पुलिस सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने मठ में रहने वाले कुछ लोगों की साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी भी करवाई है। इसमें किसी व्यक्त‍ि की मौत से पहले के दो हफ्तों के बारे में पता किया जाता है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश भी की जाती है कि मृतक दो हफ्ते पहले किस ढंग से सोच रहा था‌। उसने कहां पर वक्त बिताया था, किन लोगों से बात की थी। अगर बात की तो किस तरह की बात की थी। मरने वाले का लोगों के साथ व्यवहार कैसा था। क्या मरने वाले में सुइसाइडल टेंडेंसी भी नजर आ रही थी। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी की भी साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करवाई गई है।


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