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ग्राउंड रिपोर्ट: बेबे के बाल चिट्टे हो गए...पंजाब में कंटीले तारों के इस तरफ होगी 'बदलाव की खेती'!

अटारी बॉर्डर: सरहद पर कंटीली तारें। गेट पर बीएसएफ तैनात। एक पैर इधर भारत में दूसरा पैर धरती पर रखें तो पाकिस्तान। ये है अटारी हलके (सीट) ...

अटारी बॉर्डर: सरहद पर कंटीली तारें। गेट पर बीएसएफ तैनात। एक पैर इधर भारत में दूसरा पैर धरती पर रखें तो पाकिस्तान। ये है अटारी हलके (सीट) पर बसे पिंड पुल कंजरी और धनोए कलां। लहरा रही सरसों... खिली धूप, ठंडी हवाएं एक अलग मजा जरूर देंगी लेकिन जब हाई क्लास हाइवे से पिंड के अंदर दाखिल होंगे तो कच्ची-पक्की सड़कें, दशकों से बनने का इंतजार कर रही हैं। सिर पर परना (दस्तार) बांधे बुजुर्ग किसान बच्चों के साथ बैठे गप्पे मार रहे हैं, लेबर क्लास खेतों में काम कर रहा है। कुछ युवा चुनावी ड्यूटी के कारण राजनीतिक दलों के झंडे लगाने या पिंड-पिंड पर्चे बांट रहे हैं। माहौल यहां पूरी तरह चुनावी है। एक पेड़ पर ही कांग्रेस, अकाली, बीजेपी, आप के झंडे लगे हैं। लॉकडाउन के चलते विदेश में नौकरी छूट जाने के बाद पिंड लौटे आकाशदीप सिंह नेताओं की ओर से दिखाए सपनों की बखिया उधेड़ते हुए बताते हैं - आज हमें यहां रोजगार मिले तो अपने मां-बापू को अकेला छोड़कर कौन बाहर जाएगा। यहां मेरी बेबे के बाल आज चिट्टे (सफेद) हो गए हैं लेकिन सड़क आज तक नहीं बनी। आकाश कहते हैं, मेरी जवानी किसानी करते हुए निकल जाएगी लेकिन विकास हाइवे से अंदर नहीं आएगा। ऐसे में बदलाव की हवा यहां चल रही है। 'खाने-पीने की कमी नहीं पर फसल के सही दाम नहीं मिलते' पिंड में जब पता चला कि मैं दिल्ली से आया एक पत्रकार हूं तो लोग काफी खुश हुए। हंसते-हंसते तंज करते हुए बोले- आप भी नेता जैसे हो। 5 साल बाद हमारी याद आती है। चुनाव के नतीजों के बाद कोई नहीं आता। हम तो अपने हैं... तुहाड्डी (आपकी) सेवा करने के लिए हमेशा तैयार हैं। एक बेबे ने बताया- पुत्तर हमें खाने-पीने की कमी नहीं है, लेकिन फसलों के सही दाम नहीं मिलते। बेबे ने बताया कि वाघा सरहद के साथ लगती है और बॉर्डर के आसपास रहने वाले लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बीएसएफ की तरफ से तारों के पार अपनी जमीन पर खेती करने के लिए काफी कम समय दिया जाता है और किसान ज्यादातर मांग करते हैं कि सरकार उनकी मुश्किलों को हल करे। ड्रग्स यहां मुद्दा नहीं 2017 में सबसे बड़े मुद्दे 'उड़ता पंजाब' की सियासी चीखें 2022 के चुनाव में शांत हैं। पिंड के बुजुर्ग शुभेक सिंह ने बताया कि यहां पर लोगों को ड्रग्स जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है। शराब तो पीते हैं लेकिन हमारे पिंडों में नशा कम है। युवा बेरोजगार जरूर हैं लेकिन आधे से ज्यादा टाइम खेती में निकाल देते हैं या शहर अमृतसर में काम पर जाते हैं। शुभेक सिंह ने बताया कि मौजूदा विधायक ने काम किया है। पिछले चुनाव में 30 साल बाद कांग्रेस के तरसेम सिंह डीसी ने अकालियों का गढ़ रही इस सीट पर फतेह की थी। इस बार मुकाबले में आम आदमी पार्टी भी है। पिंड के लोग बदलाव की बात करते हैं तो सरपंच दावा करते हैं कि रेकॉर्ड मार्जिन से जीत दर्ज की जाएगी।


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