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बीजेपी के प्रदर्शन में आपसी खींचतान पर उठे सवाल, वसुंधरा की नाराजगी के चर्चे

रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर: राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की अंतर्कलह एक बार फिर उजागर हो गई है। मंगलवार 15 फरवरी को भाजपा ने राजधानी जयप...

रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर: राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की अंतर्कलह एक बार फिर उजागर हो गई है। मंगलवार 15 फरवरी को भाजपा ने राजधानी जयपुर में REET-2021 पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले विधायक शामिल नहीं हुए। पार्टी के चार विधायकों और संगठन से जुड़े कुछ प्रमुख नेताओं के नदारद रहने से पार्टी नेताओं की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई। हालांकि पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे जरूरी कार्य होने की वजह से प्रदर्शन में नहीं आ पाए जबकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि प्रदेश भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। वसुंधरा राजे, कालीचरण सराफ, प्रतापसिंह सिंघवी और कैलाश मेघवाल शामिल नहीं हुए प्रदर्शन में भाजपा के प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह सहित 68 विधायकों और 15 सांसदों के शामिल होने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इस प्रदर्शन में प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुई। राजे के कट्टर समर्थक माने जाने वाले विधायक प्रताप सिंह सिंघवी, कालीचरण सराफ और कैलाश मेघवाल भी पार्टी के प्रदर्शन से नदारद रहे। प्रदर्शन में शामिल नहीं होने वाले विधायकों की चर्चाएं पार्टी के नेताओं में भी हुई। मीडिया से सवालों पर पार्टी के नेताओं का कहना था कि किसी जरूरी कार्य के चलते ये विधायक प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाए। भाजपा के नेताओं ने पार्टी में किसी भी प्रकार की गुटबाजी से इनकार किया। 9 फरवरी को भी उगाजर हुई थी भाजपा नेताओं की अंतर्कलह 9 फरवरी को बजट सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई थी। इस बैठक में भी । बैठक में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही थी और बूंदी में सतीश पूनिया पर हुए हमले को मुद्दा बनाया जा रहा था। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा था कि जब उनके पुत्र और सांसद दुष्यंत सिंह पर हमला हुआ था। तब पार्टी के नेता चुप क्यों थे। दुष्यंत के आवास पर हुई तोड़फोड़ के बाद काफी बवाल हुआ था लेकिन पार्टी ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था। राजे की इस नाराजगी के बाद सतीश पूनिया पर हुए हमले का मुद्दा सदन में नहीं उठाया गया। इसके बाद 9 फरवरी को ही महात्मा गांधी सर्किल पर भाजपा के नेताओं ने धरना दिया। राजे इस धरने में शामिल तो हुई लेकिन चुपचाप बैठी रही। उन्होंने धरने पर संबोधन भी नहीं दिया। ऐसे में सियासी गलियारों में यही चर्चाएं हैं कि राजे और उनके समर्थकों की सतीश पूनिया के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। मुख्यमंत्री भी कह चुके - भाजपा में सीएम के कई दावेदार घूम रहे हैं भाजपा की आपसी फूट पर कांग्रेस नेता कई बार बयान दे चुके हैं। भाजपा के प्रदर्शन के बाद केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। मंगलवार 15 फरवरी को ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बाद रिप्लाई देते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी चुटकी ली थी कि विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने वाले सतीश पूनिया जी भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। इससे पहले भी मुख्यमंत्री बयान दे चुके हैं कि भाजपा में करीब एक दर्जन नेता मुख्यमंत्री के दावेदार बनकर घूम रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा भी कई बार कह चुके हैं भाजपा के नेताओं में खुद को दूसरों से श्रेष्ट साबित करने की होड़ मची हुई है।


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