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Lata Mangeshkar News : एक कमरे के घर में जन्म, सुरीली आवाज के लिए 10-12 मिर्ची... इंदौर से जुड़ी लता मंगेशकर की खास यादें

पुष्पेंद्र वैध, इंदौर : ऐसा कहते हैं कि इंसान का जन्म जिस जगह पर होता है, वहां के गुण उसमें जीवन पर्यंत रहते हैं और इसी का सर्वश्रेष्ठ उद...

पुष्पेंद्र वैध, इंदौर : ऐसा कहते हैं कि इंसान का जन्म जिस जगह पर होता है, वहां के गुण उसमें जीवन पर्यंत रहते हैं और इसी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण स्वर कोकिला लता मंगेशकर () हैं। लता मंगेश्कर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ है। जन्म के बाद जब उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा तो शायद किसी को पता भी नहीं था कि इंदौर की गलियों में जन्मी बच्ची () संगीत की दुनिया की सरताज बन जाएगी। उस वक्त इंदौर वासियों को सबसे ज्यादा खुशी हुई और आज उन्होंने मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस () ली है, तब इंदौर के लोग उनसे जुड़ी यादों को याद कर रो रहे हैं। इंदौर शहर में लता मंगेशकर से जुड़ी कई यादें हैं। लता मंगेशकर की मां के नाम पर बनाए गए माई मंगेशकर सभागृह के सचिव चंद्रकांत पराड़कर ने नवभारत टाइम्स.कॉम से बात करते हुए बताया कि शहर से उनकी यादें जुड़ी रहे इसलिए 22 वर्ष पूर्व मराठी समाज इंदूर ने माई मंगेशकर सभागृह बनवाने का निर्णय लिया। मराठी इंदूर समाज ही इस सभागृह की देख रेख करता है। आज भी लता मंगेशकर के जन्मदिन पर इस सभागृह में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन होते है। चंद्रकांत आगे बताते हैं कि 22 साल पहले मुंबई में पहली मुलाकात लता जी से हुई थी। हमेशा वे मुस्कुराते रहते है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वो सतायु हो, विश्व और देश के लिए उनका जीवंत रहना आवश्यक है। सिख मोहल्ले में लता मंगेशकर का जन्म इंदौर के सिख मोहल्ले स्थित एक मकान में लता मंगेशकर जन्म हुआ था। तब शायद सिख मोहल्ले के गलियों में रहने वाले लोगों ने कभी सोचा नहीं होगा कि इन गलियों में खेलने वाली लड़की स्वर कोकिला के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध होगी। लता मंगेश्कर जिस जगह जन्मी वहां आज मेहता क्लॉथ सेंटर खुल गया है। स्नेहल मेहता ने नवभारत टाइम्स.कॉम से बात करते करते हुए बताया कि 1990 के आस पास ये जमीन हमारे परिवार ने ले ली। करीब 30 साल से हमारा शोरूम यहां चल रहा है। आज भी मेहता क्लॉथ सेंटर में लता मंगेशकर की म्यूरल लगा हुआ है। वहीं, इंदौर के लोगों को जैसे ही लता मंगेशकर के निधन की खबर मिली। उसके बाद से ही मायूस हैं। इंदौर वासी कल तक उनकी सेहत के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे थे। साथ ही भगवान से कामना कर रहे थे कि लता मंगेशकर जल्द स्वस्थ हो जाएं। मगर उनकी दुआएं काम नहीं आई और सुरों का कारवां आज थम गया। खाने खिलाने की शौकीन लता दी मुंबई जाने के बाद लता मंगेशकर कभी लौटकर इंदौर नहीं आईं। इंदौर उनका नानी घर था। मूल रूप से उनके पिता महाराष्ट्र के रहने वाले ही थे। पांच भाई-बहनों में लता मंगेशकर सबसे बड़ी थीं। उन्हें जानने वाले लोग बताते हैं कि लता दीदी खाने खिलाने की शौकीन रही हैं। करियर शुरू करते वक्त उन्हें किसी ने कह दिया कि मिर्ची खाने से आवाज सुरीली हो जाती है। इसके बाद लता मंगेशकर रोज 10-12 मिर्च खाने लगी थीं। उन्हें जलेबी भी खाने में काफी पसंद है। वह इंदौर के सराफा की खाऊ गली के गुलाब जाबुन, रबड़ी और दही बड़े भी बहुत पसंद थे। तीन बार मकान की बिक्री इंदौर में लता मंगेशकर जन्म एक कमरे के घर में हुआ था। लता मंगेशकर और उनके परिवार के इंदौर से जाने के बाद इस घर को एक मुस्लिम परिवार ने खरीद लिया था। कुछ समय तक इस मकान में रहने के बाद उस परिवार ने इस मकान को बलवंत सिंह को बेच दिया। बलवंत सिंह भी यहां कुछ दिन रहे और उन्होंने घर मेहता परिवार को बेच दिया। मेहता परिवार 1990 के बाद से इस घर में रह रहा है और यहां अब कपड़े का एक शोरूम चलता है।


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1 comment

  1. देशरत्न, स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर
    जी को श्रद्धांजलि! (06/02/2022)

    लता दीदी!

    लता जैसा कहाँ बन पाता है कोई,
    स्वर- साम्राज्ञी न बन पाता है कोई।
    युगों-युगों में किसी वरदान के जैसा,
    ऐसा अवतार विरला पाता है कोई।

    कागज की फुलवारी में रहते बहुत,
    रातरानी के जैसा गमकता कोई।
    जाने को लोग रोज जाते ही हैं,
    ऐसे कहाँ विश्व को रुलाता कोई।

    जीवन का अंत तो सभी का है तय,
    सूरज-चंदा के जैसा चमकता कोई।
    त्याग भरा जीवन जीते हैं कम,
    यादगार पल कहाँ जीता कोई।

    गाई हैं जो नग्में लता दीदी ने,
    ऐसा हुनर कहाँ पाता है कोई।
    वक्त देखो उड़ता हवा की पीठ पे,
    अदब का फनकार मिलता कोई।

    हीरे की कीमत जौहरी ही जानता,
    ऐसा पारखी जहां में होता कोई।
    वक्त के झरोखे से ही देख पाओगे,
    स्वर-कोकिला बन के आता कोई।

    रामकेश यादव (कवि,साहित्यकार),मुंबई

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