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Rajasthan: अमित शाह ने 2023 का रोड मैप कर लिया है तैयार, कोई नहीं पाले गलतफहमी

प्रमोद तिवारी, जयपुर केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने अपने 2 दिवसीय राजस्थान दौरे में साल 2023 में होने व...

प्रमोद तिवारी, जयपुर केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने अपने 2 दिवसीय राजस्थान दौरे में साल 2023 में होने वाले राजस्थान विधानसभा आम चुनाव की तस्वीर काफी साफ करने की कोशिश की है। जहां शाह ने बीजेपी को चुनावी एक्शन मोड पर लाते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि हम सरकार नहीं गिरा रहे, लेकिन साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप हम तो 75% सीटें जीतेंगे। वहीं उन्होंने पार्टी के चुनिंदा नेताओं के बीच 15 मिनट की चाय की चर्चा पर यह भी साफ कर दिया कि पार्टी सिद्धांतों से समझौता करने वाली नहीं है। चाहे कोई भी पार्टी छोड़कर जाए। साल 1952 में जनसंघ के निशान पर चुनाव जीतने वाले 8 में से छह विधायक जमीदारी उन्मूलन कानून के खिलाफ पार्टी छोड़ गए थे। लेकिन तब भी पार्टी ने परवाह नहीं की थी। मतलब साफ है पार्टी मोदी की अगुवाई में चुनाव लड़ेगी और जीतने के बाद मोदी और शाह की जोड़ी फैसला करेगी कि राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? यानी 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी केवल मोदी के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लड़ने वाली है। स्थानीय स्तर पर सीएम का कोई चेहरा नहीं होगा। एक ओर अमित शाह ने अपने दो दिवसीय दौरे में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पूरी तवज्जो दी वहीं प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को सामने रखने और चुनिंदा पार्टी नेताओं के बीच 1952 के घटना की याद दिलाना मतलब साफ है कि पार्टी अब इस स्थिति में है कि कोई भी छोड़कर जाए तो कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं है। यह सीधा सीधा संदेश पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए आइने के माफिक साफ था। साल 2023 में राजस्थान विधानसभा के 200 में से 75% के हिसाब से 150 सीट जीतने का रोड मैप अमित शाह के दिमाग में साकार रूप ले चुका होगा। तभी उन्होंने यह बात कही है। उन्हें यह पता है कि इसके लिए केवल नरेंद्र मोदी का चेहरा ही सामने रखना होगा। क्योंकि राज्य के किसी नेता का सीएम चेहरा सामने रखने पर पार्टी में भितरघात का खतरा बरकरार रहेगा। दूसरी ओर अब कांग्रेस के लिए यह बड़ी चुनौती बनेगी कि वह अगला विधानसभा चुनाव किस सीएम फेस के आधार पर लड़ेंगे? मोदी का मुकाबला राहुल गांधी से नहीं किया जा सकता। गहलोत या पायलट में से एक का चेहरा सामने रखने पर आपसी टकराव का खतरा बढ़ेगा। अमित शाह ने साल 2023 के विधानसभा चुनावी शतरंज की बिसात अभी से बिछाकर मोदी के नाम पर एक बार तो कांग्रेस को मात दे दी है। चुनावी समर के इस शह और मात के खेल में वैसे अभी कई चाले चलना बाकी है। यहां पर हम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से पार्टी के चुनिंदा नेता प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, प्रभारी महामंत्री अरुण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर के बीच जनसंघ के जमाने की 1952 की घटना याद दिलाते हैं। उस समय विधानसभा में जमीदारी प्रथा उन्मूलन कानून के पक्ष में जनसंघ के 8 में से मात्र दो विधायक दातारामगढ़ से भैरों सिंह शेखावत और बड़ी सादड़ी से जगत सिंह जाला ही पक्ष में थे। जनसंघ के बाकी छह विधायक दिलीप सिंह, केसर सिंह, लाल सिंह शक्तावत, प्रताप सिंह, संग्राम सिंह और विजय सिंह इस बिल के खिलाफ पार्टी छोड़ गए। लेकिन जनसंघ ने अपना स्टैंड बरकरार रखा। आज अमित शाह का बीजेपी के नेताओं को साल 1952 की याद दिलाना मतलब साफ है हमारे लिए पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी ही सर्वोपरि हैं। बाकी कौन मुख्यमंत्री होगा? यह तो हम तय करेंगे। वैसे अमित शाह ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रभारी होने के नाते बीजेपी को उत्तरप्रदेश में एक बार फिर स्थापित कर अपना लोहा मनवा दिया था। ऐसा ही लग रहा है कि वह अपने दिमाग में साल 2023 विधानसभा चुनाव के लिए भी तय कर चुके हैं।


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